बाजरा की नई किस्म आरएच 234 पर प्रक्षेत्र दिवस पर किसानों ने नई किस्म व तकनीकों से जुड़ी जानकारी प्राप्त की
रामगढ़ (अलवर/ राधेश्याम गेरा) गुजरपुर खुर्द गाँव में बाजरा की नई किस्म आर.एच.बी 234 पर प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन गया |
कृषि विज्ञान केंद्र नौगांवा पर केंद्रीय बारानी कृषि अनुसंधान संस्थान –हैदराबाद द्वारा संचालित राष्ट्रीय जलवायु समुत्थान कृषि में नवप्रवर्तन (NICRA) परियोजना के अंतर्गत गूजरपुर खुर्द गाँव में बाजरा की जिंक-समृद्ध बायोफोर्टिफाइड किस्म RHB-234 पर प्रक्षेत्र दिवस का सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर किसानों ने नई तकनीकों और किस्म की विशेषताओं की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विज्ञान केंद्र नौगांवा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. सुभाष चंद्र यादव ने की। उन्होंने किसानों को बताया कि बाजरा की यह नई किस्म न केवल पोषण की दृष्टि से बेहतर है बल्कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने में भी कारगर है।
केंद्र के विषय विशेषज्ञ डॉ. हंसराम माली ने बाजरा की उन्नत किस्मों तथा जलवायु अनुकूल तकनीकों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों को समझाया कि किस प्रकार उन्नत बीज, समय पर बुवाई और वैज्ञानिक तकनीकों से उत्पादन व आय को बढ़ाया जा सकता है। इस दौरान केंद्र के वरिष्ठ अनुसंधान अध्येता पुष्कर देव ने बाजरे की कम पानी में सफल खेती की तकनीक साझा की। उन्होंने किसानों को जलवायु अनुकूल उपायों जैसे
- समय से बुवाई,
- वर्षा जल संरक्षण हेतु फार्म पॉन्ड का निर्माण,
- ड्रिप सिंचाई (बूंद-बूंद पद्धति),
- पशुओं के लिए सालभर हरे चारे की व्यवस्था हेतु उपयुक्त फसलों का चयन,
- प्रतिकूल मौसम में फसल और पशुओं की देखभाल,
- कृषि यंत्रों की उपलब्धता हेतु कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना,तथा
- चारा बैंक और बीज बैंक की स्थापना जैसे उपायों की जानकारी दी।
पुष्कर देव ने किसानों के साथ बाजरे से संबंधित तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा भी की। प्रक्षेत्र दिवस में गूजरपुर खुर्द गाँव के 80 से अधिक महिला एवम पुरुष किसानों ने भाग लिया और नई किस्म व तकनीकों से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर लाभ उठाया। किसानों ने इस आयोजन को उपयोगी बताते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियाँ उन्हें बदलते मौसम में टिकाऊ खेती की दिशा में मार्गदर्शन देती हैं।