अहोई अष्टमी व्रत आज संतान की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने रखा व्रत, की शाम को तारों की छांव में पूजा
लक्ष्मणगढ़ (अलवर ) कमलेश जैन
अहोई अष्टमी का व्रत 13 अक्टूबर को आज मनाया गया । माताओ ने अपनी संतान की लम्बी आयु और खुशहाली के लिए व्रत किया। और शाम को तारों की छांव में अहोई माता की पूजा की। महिलाओं ने निर्जला व्रत रख शाम को तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोला । आज का पर्व मार्तृत्व प्रेम और पारिवारिक एकता का प्रतीक है।
कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर आज श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। आज के पर्व पर माताओ ने अपनी संतान की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और मंगल की कामना के लिए उपवास रखकर शाम को तारों की छांव में अहोई माता की आराधना की।
शाम को आकाश में तारे दिखाई देने पर उन्होने अर्घ्य अर्पित कर व्रत का पारण किया। कुछ महिलाओ ने चंद्रदर्शन के बाद व्रत का पारण किया।
महिलाएं बच्चों की दीर्घायु और स्वास्थ्य की कामना करती हैं और तारे निकलने के बाद पूजा संपन्न कर व्रत खोलती हैं। योग शिक्षक पंडित लोकेश कुमार ने बताया कि श्रद्धापूर्वक अहोई अष्टमी का व्रत करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। और घर में सुख, समृद्धि तथा सौभाग्य का वास होता है। अहोई अष्टमी को अहोई आठें नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व करवा चौथ के चार दिन बाद और दीपावली के आठ दिन पूर्व मनाया जाता है। परंपरानुसार यह व्रत मातृत्व प्रेम, त्याग और आस्था का प्रतीक माना गया है, जो सनातन संस्कृति की पारिवारिक एकता को सुदृढ़ करता है।