ओबीसी आरक्षण के बिना राजस्थान में पंचायत चुनाव असम्भव,कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप
जयपुर (कमलेश जैन) राजस्थान के नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ में एक दिवसीय दौरे के दौरान ओबीसी आरक्षण (OBC के मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है।उन्होंने दो-टूक लहजे में कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को सुनिश्चित किए बिना राज्य में नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव कराना किसी भी सूरत में संभव नहीं है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब प्रदेश में निकाय और पंचायत चुनावों की संभावित देरी को लेकर राजनीतिक गलियारों में गरमागरमी है।.
सरदार पटेल जयंती पर आयोजित एकता पदयात्रा में बयान
मंत्री खर्रा का यह बयान लक्ष्मणगढ़ के रामलीला मैदान में आया। यहां सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एकता पदयात्रा में शामिल होने पहुंचे थे। उन्होंने पदयात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और उपस्थित लोगों को संबोधित भी किया। अपने संबोधन में मंत्री खर्रा ने सरदार पटेल के योगदान को याद किया, लेकिन भाषण का मुख्य केंद्र कांग्रेस द्वारा ओबीसी आरक्षण को लेकर फैलाए जा रहे 'भ्रम' और चुनावों की तैयारियों पर रहा।
चुनावी प्रक्रिया पर स्थिति स्पष्ट, 'एक साथ होंगे चुनाव'
मंत्री खर्रा ने विपक्षी दलों द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को खारिज करते हुए राज्य सरकार के स्टैंड को साफ किया। उन्होंने नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों की देरी की वास्तविक वजहों को स्पष्ट रूप से सामने रखा।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सितंबर में ही चुनाव संबंधी नोटिफिकेशन जारी कर दिया था, लेकिन चुनाव प्रक्रिया में दो मुख्य कार्य अभी लंबित हैं।राज्य पिछड़ा आयोग को पिछड़ा वर्ग की आबादी के आंकड़े जुटाने का कार्य पूरा करना है। ओबीसी आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए यह प्रक्रिया अनिवार्य है। साथ ही, राज्य निर्वाचन विभाग द्वारा मतदाता सूची का अंतिम रूप तैयार होना बाकी है। यूडीएच मंत्री ने जोर देकर कहा कि इन सभी प्रक्रियाओं के बाद ही, नगरीय निकाय व पंचायत चुनाव एक साथ करवाए जाएंगे।
कांग्रेस चाहती है बिना ओबीसी आरक्षण चुनाव हो जाए'
इस मौके पर मंत्री खर्रा ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह चाहती है कि ओबीसी आरक्षण के बिना ही चुनाव हों, लेकिन बीजेपी सरकार ऐसा नहीं होने देगी। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि सरकार ओबीसी आरक्षण की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले चुनाव कराने के पक्ष में नहीं है, भले ही इसमें कुछ समय लगे।