रोडवेज का सफर असुरक्षित; अधिकतर बसों में नहीं हैं, फर्स्ट एडबॉक्स,फायर सेफ्टी सिलिंडर- जैकी
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन ) राजस्थान रोडवेज बसों में फर्स्ट एड बॉक्स नहीं हैं। हैं तो उनमें दवाई मौजूद नहीं है। फायर सेफ्टी सिलिंडर भी खाली पड़े हैं। कुछ में तो एक्सपायरी तक अंकित नहीं है।
रोडवेज में सफर के दौरान अचानक आपको कोई चोट लग जाए, खून निकल आए तो आप परेशान हो सकते हैं। कुछ में तो एक्सपायरी तक अंकित नहीं है। अब यदि हादसा या आगजनी हो तो यात्रियों के बचाव की कोई सुविधा नहीं है। परिवहन निगम की बसों की पड़ताल की तो यह हकीकत सामने आई। परिवहन निगम के सुरक्षित सफर के दावे यहां हवाई नजर आए।
घटना आज रविवार को सवार होकर जयपुर प्रातः 7:00 बजे से चलने वाली दोसा डिपो निगम की बस नंबर RJ13 PA 8670 लक्ष्मणगढ़ होते हुए गोविंदगढ (अलवर) पहुँचती है|
यात्री जैकी खंडेलवाल जयपुर से सवार होकर लक्ष्मणगढ़ आ रहे थे। उन्होंने शीशे को खोलना चाहा तो अंगूठे में गहरी चोट लग गई खून बहने लगा था। फर्स्ट एड बॉक्स (प्राथमिक चिकित्सा किट) को देखा गया कोई दवाई इसमें मौजूद नहीं थी। चालक परिचालक से पूछा तो बताया कि निगम की ओर से कोई दवाई नहीं दी जाती है।
इसी बस में फायर सेफ्टी सिलिंडर गंदगी से घिरा पड़ा था। उठाकर देखा गया तो इसमें न तो कोई ब्यौरा था और न ही यह जानकारी थी कि कब एक्सपायर होगा। इसके अलावा अलवर डिपो की बस को भी देखा गया बस में बॉक्स ही नहीं था। अब ऐसे में यही बात सामने आती है कि सवारियों से टिकट के पैसे वसूलकर रोडवेज केवल उनको गंतव्य तक पहुंचाने का काम करता है। बीच सफर में उनकी जान की कोई परवाह नहीं है।
यह है नियम
चलती बस में यदि यात्री को कोई चोट आ जाए या खून बहने लगे तो इसके लिए प्रत्येक बस में फर्स्ट एड बॉक्स की सुविधा मुहैया होती है। इसमें रूई, पट्टी, डेटॉल के साथ अन्य उपचार संबंधी मरहम आदि होते हैं ताकि घायल व्यक्ति को प्राथमिक उपचार देकर उसकी चोट से बह रहे खून को रोका जा सके।
आम बसों की तरह होती है इनकी भी फिटनेस
रोडवेज बसाें की फिटनेस जांच भी सामान्य वाहनों की तरह ही होती है। जांच के दौरान फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र, ब्रेक, हार्न, वाइपर, इंडिकेटर, साफ-सफाई, प्रदूषण, स्टेयरिंग, लाइट, ढांचा (लंबाई व चौड़ाई), वाहन चलने लायक है कि नहीं, शाकर, चेसिस, बाडी, इंजन, स्पीडोमीटर, गेयर, टायर, शीशा, इलेक्ट्रिकल (वायरिंग), डेंट-पेंट, नंबर प्लेट, परवर्ती टेप, टैक्स और बीमा की जांच होती है लेकिन जांच के दौरान इस पर ध्यान नहीं दिया जाता है।