निरंकार की रजा में जीवन जीना ही सच्ची साधना निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज
खैरथल (हीरालाल भूरानी) निरंकार की रजा में जीवन जीना ही सच्ची साधना है यह प्रेरणादायक विचार निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज द्वारा नव वर्ष के शुभ अवसर पर हजारों श्रद्धालुओ को संबोधित करते हुए कहा कि नव वर्ष का प्रथम दिवस हमें संतों के वचनों को सुनने और उन्हें जीवन में अपनाने का अनमोल अवसर देता है
इसी क्रम में नव वर्ष के उपलक्ष में निरंकारी सत्संग भवन अलवर के जिला संयोजक सोमनाथ जी ने अपार श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि हमें पुराने अनुभव से सीख लेकर मानवीय गुणो को अपनाकर और परमात्मा इस निराकार के ज्ञान को जीवन में उतारकर प्रेम, सेवा और समर्पण के साथ जीवन जीना चाहिए आगे उन्होंने कहा कि हम अपनी पुरानी कमियो को दूर करके अच्छाइयों को अपना कर एक सार्थक जीवन जीते चले जाएं।
सतगुरु माता जी एवं निरंकारी राज पिताजी के दिव्य दर्शन और प्रेरणादायक वचनो को
सतगुरु ने अपने उद्बोधन में कहा कि नव वर्ष के प्रथम दिन हम शुभकामनाएं देते हैं और नए संकल्प लेते हैं पर वास्तविक परिवर्तन तभी सार्थक होता है जब ये अपने अंतर आत्मा से आए संत आत्म मंथन द्वारा सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं और निरंकार को सर्वोपरि मानते हुए सेवा, सिमरन, सत्संग को जीवन में प्राथमिक देते हैं नव वर्ष तारीख परिवर्तन नहीं बल्कि प्रेम, मिठास, सौम्यताऔर समझ को अपनाने का अवसर है हर सांस में सुमिरन हो, हर क्षण में निरंकार का वास हो, यही नव वर्ष का सच्चा अर्थ और संदेश है ।

