भरतपुर के शहद की शुद्धता, गुणवत्ता, उपलब्धता एवं कीमत की बने देशभर में पहचान - जिला कलक्टर
भरतपुर, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) शहद की गुणवत्ता एवं शुद्धता में भरतपुर के मधुमक्खी पालकों का मुकाबला कोई नहीं कर सकता साहब...। लेकिन हमारा शहद सरसों के फूलों से बना है जो सर्दियों में जम जाता है। लोगों में भ्रांति है कि जमने वाला शहद मिलावटी होता है, हमें भरतपुर के शहद की विशेषताओं को बताने एवं क्रेताओं तक पहुंच बनाने के लिए सरकार से सहयोग की जरूरत है तभी हम रोजगार कर पायेगें। पंच गौरव योजना के तहत गुरूवार को कृषि सभागार में आयोजित जिले के मधुमक्खी पालकों की एक दिवसीय कार्यशाला में ये विचार जिला कलक्टर कमर चौधरी के समक्ष जिले के मधुमक्खी पालकों ने रखे।
जिला कलक्टर के समक्ष मधुमक्खी पालकों ने अपनी समस्याओं को खुलेमन से रखकर शहद प्रोसेसिंग एवं विक्रय के समय आ रही परेशानियों, निजी कम्पनियों द्वारा किये जा रहे एकाधिकार, गर्मियांे के मौसम में ठंडे प्रदेशों में कॉलोनियों को शिफ्ट करने में आने वाली परेशानियों से अवगत कराया। मधुमक्खी पालक किसानों से उत्पादित शहद की लैब टेस्टिंग से लेकर विपणन के समय की जाने वाली गतिविधियों के लिए भरतपुर के शहद को किस प्रकार दुनियाभर में अलग पहचान बनाई जाये इसके लिए मधुमक्खी पालकों ने सुझाव भी दिये।
समूह एवं सहकारी सिद्धांत से बढे़ं आगे- जिला कलक्टर
कार्यशाला में जिलेभर से आये मधुमक्खी पालकों को सम्बोधित करते हुए जिला कलक्टर कमर चौधरी ने कहा कि भरतपुर के शहद को शुद्धता एवं गुणवत्ता के लिए जाना जाता है हमें यह पहचान देशभर में बनाने की आवश्यता है। उन्होंने कहा कि मधुमक्खी पालक किसान एक समूह बनाकर एफपीओ के माध्यम से अथवा सहकारिता विभाग से जुड़कर लैब, प्रोसेसिंग एवं विपणन के लिए सामुहिक रूप से प्रयास करें। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री महोदय द्वारा बजट में मधुमक्खी पालन के लिए उत्कृष्टता केन्द्र की घोषणा की थी जिसमें लैब, प्रोसेसिंग एवं प्रशिक्षण की उन्नत व्यवस्था रहेगी। उन्होंने कहा कि शहद को पंच गौरव योजना में शामिल किया गया है इसके गौरव को देशभर में बढ़ाने के लिए हमें सामुहिक प्रयास करने होगें। देश में हर जगह भरतपुर के शहद की अलग पहचान बने, शुद्धता, गुणवत्ता, कीमत एवं उपलब्धता से अन्य जगह या कम्पनी के उत्पादों का मुकाबला कर सके।
प्रमोशन फिल्म बनेगी-
जिला कलक्टर ने कहा कि भरतपुर के शहद की विशेषताओं को देश दुनिया में पहुंचाने के लिए पंच गौरव योजना में प्रमोशन फिल्म बनवाई जायेगी जिससे यहां के मधुमक्खी पालकों के द्वारा उत्पादित शहद की जानकारी देशभर के लोगों तक पहुंच सके। उन्होंने कहा कि जिले के मधुमक्खी पालक किसान यदि समूह बनाकर प्रोसंसिंग के लिए यूनिट लगाना चाहेंगेे तो उन्हें जिला प्रशासन द्वारा सक्रियता से सहयोग किया जायेगा तथा उद्यमिता योजनाओं का लाभ दिलाया जायेगा। उन्होंने कहा कि भरतपुर के शहद उत्पादक किसानों की इमानदारी, मेहनत एवं पहचान देश-दुनिया तक पहुंचे इसके लिए विपणन के नये क्षेत्र तलाश कर प्रचार प्रसार किया जायेगा। उन्होंने कृषि विशेषज्ञों, ऐपियोलोजिस्ट व शहद उत्पादकों के टेस्टिेमॉनियल तैयार करवाकर सोशल मीडिया एवं इंटरनेट के माध्यम से आमजन तक पहुचाने के प्रयास मिलकर करने का सुझाव दिया।
जिला कलक्टर ने युवा मधुमक्खी पालकों से संवाद करते हुए कहा कि युवा नई सोच के साथ आगे आयें, हिम्मत के आगे जीत निश्चित है। उन्होंने युवाओं को उननत प्रशिक्षण एवं प्लानिंग बनाकर सामूहिक रूप से भरतपुर के शहद को पहचान दिलाने के लिए कार्य करने का आव्हान किया।
उप निदेशक उद्यान जनकराज मीना ने कहा कि मधुमक्खी पालक किसानों को उन्नत तकनीकी ज्ञान के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजि किए जायेगेें। क्रेता एवं विक्रेताओं में समन्यवय का प्रयार होगा। उन्होंने बताया कि मधुमक्खी पालकों को पंच गौरव योजना में आवश्यक संसाधन एवं विशेषज्ञों से प्रशिक्षण दिलाने की योजना विभाग स्तर पर तैयार की गई है। इस अवसर पर संयुक्त निदेशक कृषि राधेश्याम मीना, उप निदेशक भम्भलसिंह, उप निदेशक सांख्यिकी रामकल्याण मीना सहित जिले के कृषि अधिकारी, विशेषज्ञ उपस्थित रहे।