चारित्र शुद्धि महामण्डल विधान को चढाये 411अर्घ्य

Jan 31, 2026 - 11:39
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चारित्र शुद्धि महामण्डल विधान  को चढाये 411अर्घ्य

जयपुर, (कमलेश जैन)  साधना महोदधि अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में मानसरोवर के शिप्रा पथ वी टी रोड स्थित हाऊसिंग बोर्ड ग्राऊंड  में आठ दिवसीय चारित्र शुद्धि विधान  विधानाचार्य तरुण भैय्या इन्दौर के निर्देशन में बड़ी ही भक्ति भाव से चल रहा है।
अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने धर्म सभा में कहा कि मन, भाव और विचार ऐसे रखो कि आपके मन की निश्छलता, भावों की विशुद्धि, और विचारों की पारदर्शिता पर लोग विचार करें..!
अच्छा सोचे, अच्छा देखे, अच्छा बोले, अच्छा सुने, अच्छा करे, और सबके प्रति सदभाव प्रेम बनाकर चले फिर देखें, सफलता कैसे आपके चरण चूमती है। जीवन की सफलता के लिए मस्तिष्क में आइस की फैक्ट्री और जुबान पर शूगर की मशीन लगायें।
जो लोग धैर्य, विवेक बुद्धि, और संकल्प के श्रम से अपने कार्य को अंजाम देते हैं, वही लोग सफलताओं के शिखर पर पहुंच पाते हैं। जो जीवन में आने वाली  हर एक समस्या को समता की बुहारी से अपने मार्ग को बुहारते चले जाते हैं, वे लोग ही हँसते मुस्कुराते हुये एक दिन अपने लक्ष्य को पा लेते है।
समिति अध्यक्ष सुभाष चन्द जैन एवं महामंत्री विनोद जैन कोटखावदा ने बताया कि  उपाध्याय पियूष सागर महाराज के मार्गदर्शन में प्रतिष्ठाचार्य बा. ब्र. तरुण भैय्या के निर्देशन में शनिवार 31 जनवरी को सात दिन से चल रहे श्री श्री 1008 चारित्र शुद्धि महामण्डल विधान का विश्व शांति महायज्ञ के साथ समापन होगा। इस मौके पर प्रातः 7 बजे से अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजा के बाद चारित्र शुद्धि महामण्डल विधान की अंतिम 2 पूजाए होगी। जिनमें भक्ति भाव के साथ 18 अर्घ्य चढाये जाएगे। तत्पश्चात विश्व शांति महायज्ञ अनुष्ठान में मंत्रोच्चार के साथ आहूतियां दी जाकर पूर्णाहुति दी जाएगी। 
कोषाध्यक्ष कैलाश चन्द छाबड़ा ने बताया कि रविवार, 01  फरवरी को जयपुर में पहली बार विवाह अणुव्रत संस्कार महोत्सव का आयोजन होगा।  रविवार को प्रातः 7.00 बजे से 1 वर्ष से 25 वर्ष तक के विवाहित जीवन जीने वाले दम्पतियों के लिए विशेष रूप से आयोजित होने वाले इस महोत्सव में इन दम्पति सदस्यों को आदर्शमयी वैवाहिक जीवन एवं संयम और संस्कार युक्त आचरण के बारे में बताते हुए जीवन में सामंजस्य एवं समन्वय स्थापित कर आपसी रिश्ते में मजबूती एवं सफलता के बिन्दु बताए जाएगें।
इससे पूर्व आचार्यश्री ससंघ के सानिध्य में चल रहे श्री श्री चारित्र शुद्धि महामण्डल विधान में शुक्रवार को प्रतिष्ठाचार्य बा. ब्र. तरुण भैय्या इन्दौर के निर्देशन में श्री जी के अभिषेक के बाद में विश्व में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए शांतिधारा की गई। नवदेवता की पूजा के बाद श्री चारित्र शुद्धि महामण्डल विधान की समुच्चय पूजा की गई।  भक्ति भाव से एषणा समिति पूजा करते हुए अष्ट द्रव्य से 411 अर्घ्य के साथ मण्डल पर धर्म ध्वजाऐं चढाई गई । इस मौके पर आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि जो लोग धैर्य, विवेक बुद्धि, और संकल्प के श्रम से अपने कार्य को अंजाम देते हैं, वही लोग सफलताओं के शिखर पर पहुंच पाते हैं ।
इससे पूर्व सौम्य मूर्ति उपाध्याय पियूष सागर महाराज ने कहा कि इमानदार मजबूरी से नहीं मजबूती से बनो।  महोत्सव समिति के महामंत्री विनोद कुमार जैन कोटखावदा के अनुसार आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज के पाद पक्षालन का पुण्यार्जन मुनि भक्त गिरीश- मीना कासलीवाल, सुनीला, सन्नी जैन एवं झांझरी परिवार गायत्री नगर  ने किया। 
चारित्र शुद्धि व्रत एवं विधान*- अपने जीवन के पापों को धोने का उपाय है चारित्र शुद्धि महामण्डल विधान ।अपने जीवन के खोटो को दूर करने एवं चारित्र के दोषों से बचने के लिए जीवन में एक बार चारित्र शुद्धि महामण्डल विधान पूजा करना आवश्यक है। 
चारित्र शुद्धि के 1234 व्रत करने से तीर्थंकर पद की प्राप्ति होती है । जैन परम्परा में चारित्र तेरह प्रकार का प्रतिपादित किया गया है। पांच महाव्रत-अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य तथा परिग्रह त्याग महाव्रत। पांच समिति - ईर्या, भाषा, एषणा, आदान निक्षेपण और प्रतिष्ठापन समिति।

तीन गुप्ति -मनोगुप्ति, वचनगुप्ति तथा काय गुप्ति। 
जैन परम्परा में साधकों के लिए परिणाम शुद्धि के लिए अनेक विधानों की विधि का उल्लेख किया गया है। उसी में चारित्र शुद्धि व्रत के 1234 उपवास व पूजा की विधि का सम्यक निरुपण किया गया है। 
तेरह प्रकार के चारित्र का शुद्धि के लिए उपवासों के परिपालन का विधान निरुपित किया गया है। यह विधान प्रत्येक मानव के लिए कल्याण पथ पर अग्रसर होने के लिए विधि का वर्णन करता है। इसमें 14 पूजाएं की जाती है। जिनमें अहिंसा महाव्रत पूजा में 126 अर्घ्य, सत्य महाव्रत पूजा - 72,अचौर्य महाव्रत - 72, ब्रह्मचर्य महाव्रत - 180,आकिंचन्य महाव्रत - 216,रात्रि भुक्ति त्याग व्रत पूजा-10,मन गुप्ति-9,वचन गुप्ति-9,काय गुप्ति-9,ईर्या समिति-9,भाषा समिति - 111,एषणा समिति - 411,आदान निक्षेपण समिति - के  9 तथा व्युत्सर्ग समिति प्रतिपालक मुनि पूजा - 9  अर्ध्य शनिवार को चढाये जायेंगे , तत्पश्चात विश्व शांति महायज्ञ किया जायेगा।
इस तरह से मण्डल पर 1234 अर्घ्य चढाये जायेगें। 
चारित्र शुद्धि व्रत के दिन असयंम के कार्य, श्रृंगार, टीवी सीरियल, हिंसक पदार्थों का त्याग के साथ कषाय के आवेग को भी शांत रखकर स्वाध्याय एवं पाठादि करते हुए बहुमान पूर्वक व्रताचरण किया जाता है। 

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