भगवान कार्तिकेय व गणेशजी की उत्पत्ति की कथा सुनाई

Jan 31, 2026 - 11:40
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भगवान कार्तिकेय व गणेशजी की उत्पत्ति की कथा सुनाई

सकट (अलवर) कस्बे की नदी किनारे स्थित रामेश्वर चार धाम वीर हनुमान मंदिर पर पाटोत्सव के उपलक्ष्य मे जय हनुमान जन उपयोगी सेवा संस्थान ट्रस्ट सकट के तत्वाधान में आयोजित मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा व महारूद्राभिषेक के पावन अवसर पर चल रही शिवमहापुराण कथा में कथा व्यास शिव चैतन्य ने भगवान कार्तिकेय व भगवान गणेश की उत्पत्ति की कथा सुनाई। विघ्नहर्ता भगवान गणेश व कार्तिकेय के उत्पत्ति की कथा सुन श्रोतागण भावविभोर हो उठे। कथा व्यास शिव चैतन्य ने शिवमहापुराण की कथा सुनाते हुए श्रोताओं को बताया कि भगवान भोलेनाथ का तेज जब पृथ्वी पर गिरा तो पृथ्वी व्याकुल हो गई। पृथ्वी को व्याकुल देख भगवान शिव के तेज को अग्नि ने खा लिया। ऋषियों की छ पत्नियों ने अग्नि को तप करके पा लिया।चूंकि शिव के तेज को अग्नि ने खा लिया था इसलिए ऋषियों की पत्नियां भी उस तेज को सहन न कर पाईं और गंगा नदी में प्रवाहित कर दिया।मां गंगा भी भगवान का तेज नहीं सहन कर सकीं तब उन्होंने किनारे पर उगे हुए सरकंडों यानि सरपत मे भगवान शिव के तेज को फेंक दिया नदी किनारे फेंके गए उसी तेज से भगवान शिव के बड़े पुत्र स्कंद भगवान की उत्पत्ति हुई।चूंकि भगवान स्कंद का पालन पोषण छ कृतिकाओं ने किया इसीलिए कृतिकाओं द्वारा पालन पोषण किये जाने के कारण ही आगे चलकर इनका नाम भगवान कार्तिकेय पड़ा।

विघ्नहर्ता भगवान गणेश जी की उत्पत्ति के विषय में बताया कि भगवान गणेश जी का जन्म माता पार्वती जी के शरीर के मैल हुआ है।भगवान गणेश जी का सिर भगवान शिव जी ने काट डाला था।पुत्र का सिर अपने पति द्वारा काट डालने से जब पार्वती अत्यधिक क्रोधित हो उठीं तब भगवान शिव ने हाथी का सिर काटकर भगवान गणेश जी के धड़ में लगा दिया और गणेश जी का वास्तविक सिर चंद्रदेव अपने पास उठा ले गए।इसी कारण गणेश चतुर्थी का व्रत करने पर माताओं के द्वारा चंद्रमा का दर्शन करके अर्ध्य देने की परंपरा बनी है। माताएं अपने पुत्रों की दीर्घायु के लिए अर्ध्य देकर गणेश जी के वास्तविक स्वरूप की पूजा करती हैं।इसीलिए माताओं द्वारा किये गए व्रत से उनके पुत्रों की रक्षा होती है। इस दौरान भगवान श्री गणेश जी व कार्तिकेय जी की संजीव झांकी सजाई गई जो आकर्षण का केन्द्र रही। कथा के दौरान गाएं गए भजनों पर महिला श्रद्धालुओं ने नृत्य किया। मंदिर महंत रमाकांत जैमन व ट्रस्ट अध्यक्ष निरंजन बडाया ने बताया कि रविवार को हनुमान जन्मोत्सव कथा विश्राम मूर्ति प्राणप्रतिष्ठा व पूर्णाहुति व भंडारे का आयोजन होगा। इस मौके पर ट्रस्ट के मुख्य व्यवस्थापक हरिमोहन शाहरा, उपाध्यक्ष उमेश डांटा,मोहन रावत, उमाशंकर मेहरवाल सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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