शिव धनुष भंग होते ही भावुक हो गए राजा जनक; लटूरियां हनुमान पर रामकथा एवं रामलीला में उमड़ रहा जनसैलाब
भरतपुर (विष्णु मित्तल) श्री लटूरियां हनुमान भक्त मण्डल एवं तपस्वी बाबा रामशरणदास महाराज के शिष्यों के द्वारा जयपुर नेशनल हाईवे सेवर- आगरा बाईपास, राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज के पीछे स्थित प्राचीन व आस्था से भरपूर श्री लटूरियां हनुमान आश्रम पर महन्त भानूदास महाराज एवं सन्त मनीरामदास महाराज के सानिध्य में आश्रम के तपस्वी व महन्त रहे सन्त रामशरणदास महाराज की 29वीं पुण्यतिथि पर आयोजित हो रही रामकथा एवं रामलीला में भारी संख्या में सन्त और श्रद्धालु उमड़ रहे हैं।
श्रद्धालु श्री लटूरियां हनुमान एवं देशभर से आ रहे सन्तों के दर्शन कर विश्व शांति, देश व समाज के उत्थान, मानव व परिवार कल्याण की कामना कर रामकथा का रसपान कर रहे हैं। श्रीमदभागवत विद्यापीठ अयोध्या के सन्त एवं कथा वाचक तुलसीदास नव्य न्यायाचार्य ने भगवान श्रीराम की बाल लीला और विश्वामित्र, मिथिला नगर दर्शन, सीता स्वयंवर, शिव धनुष भंग, लक्ष्मण-परशुराम संवाद आदि भगवान श्रीराम-सीता विवाह आदि प्रसंग सुनाए।
जब भगवान श्रीराम ने शिव धनुष भंग किया तो, उसे देख मिथिला के राजा जनक जी भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि एक बार देवी सीता ने वह धनुष उठा लिया जिसे परशुराम जी के अलावा कोई नहीं उठा सकता था, तब सन्त ने भगवान राम को शिव जी के धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाने को कहा। गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए भगवान राम शिव जी के धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाने लगे और धनुष टूट गया और तब राजा जनक ने श्रीराम जी से सीता का विवाह करा दिया।
लटूरियां हनुमान आश्रम के महन्त भानूदास महाराज एवं मनीरामदास महाराज ने बताया कि तपस्वी बाबा रामशरणदास महाराज की 29वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में 26 फरवरी से श्रीराम कथा, रामलीला एवं सन्त दर्शन आदि कार्यक्रम हो रहे हैं जो 7 मार्च तक जारी रहेंगे। 6 मार्च को श्रीराम कथा एवं रामलीला का समापन होगा और 7 मार्च को सन्त समागम, श्रीराम यज्ञ एवं भण्डारा होगा। इसी दिन आश्रम के सन्त मनीरामदास महाराज को महन्त की उपाधि प्रदान की जाएगी।
कार्यक्रम में भरतपुर शहर एवं आश्रम के निकटवर्ती गांवों सहित उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, हरियाणा, मध्य प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, पंजाब, गुजरात आदि राज्यों के सन्त और श्रद्धालु भाग ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि संत समागम में हिमालय के महामंडलेश्वर अभिरामदास एवं अयोध्या के महंत रामदास सहित अयोध्या, मथुरा, वृन्दावन, चित्रकूट, पुष्कर, जनकपुरी, बनारस, प्रयागराज, गोवर्धन आदि स्थानों के संत प्रवचन करेंगे।