नियमों की उड़ाई जा रही है धज्जियां बिना लाइसेंस के चल रही मांस की दुकाने
अंता (शफीक मंसूरी) कस्बे में मांस का कारोबार खुलेआम चल रहा है. बाजार में संचालित अधिकांश दुकानों के पास अनिवार्य व्यापार लाइसेंस तक नहीं है. नियमों के अनुसार, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मांस विक्रय के लिए लाइसेंस लेना आवश्यक है कस्बे में मीट की दुकानों पर तीन तीन माह के मादा बकरी तक काटी जा रही है कई बार देखनो को मिलता है ऐसी ऐसी बूढ़ी बदबूदार बकरी यहाँ तक कई बार ऐसी ऐसी बकरी काटी जाती है जिसके पेट में बच्चे तक होते है जो सरकारी मापदंड के अनुसार गलत तो है ही जिससे ऐसे मीट से लोगों के अंदर बीमारी का भी बहुत बड़ा कारण बनता है लेकिन यहां इसका पालन नहीं किया जा रहा है. सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि मांस की दुकानों को पर्दे या कांच से ढककर रखा जाए, ताकि गंदगी बाहर न फैले और आम लोगों को असुविधा न हो इसके विपरीत कस्बे में मीट बेचा जा रहा है
मीट की दुकानों पर मीट बेचने में भेदभाव किया जाता है-
अक्सर देखा जाता है कि मीट की दुकानों पर लोगों के साथ भेदभाव किया जाता है जो गुप चुप तरीके से लेने आते है और मीट की जानकारी के अभाव में दुकानदार मरेठली (टांट ) बीमारी से ग्रस्त बूढ़ी बूढ़ी बकरी भेड़ को अक्सर काटी जाती है और यह मांस उन्ही लोगो को बेचा जाता है यदि जो धार्मिक परंपराओं के अनुसार मांस खाया जाता वह लोग मांस लेने जाते हैं उन लोगों से मना किया जाता है आपके काम का नहीं है वह यह भेदभाव वाले शब्द सुन कर चला जाता है बाद में स्वास्थ अच्छा मांस लेने वालों को वापस फोन लगाकर बुलाकर दिया जाता है
नगर पालिका अधिशासी अधिकारी दीपक नागर बताया की अभियान चलाकर नियम विरुद्ध और खुले में मांस की बिक्री करने वालों के खिलाफ कार्यवाही की जायगी यदि मानक अनुसार मांस बेचा जाता है तो खाद्य व स्वास्थ्य विभाग को अवगत कराकर नियम अनुसार कार्रवाई की जाएगी बकरे का मांस बेचने के कई मानक तय किये गए हैं. स्वास्थ्य एवं पशु चिकित्सा विभाग की स्पेशल गाइडलाइन है स्वस्थ बकरे का मांस बेचने की बात कही है जिसे लाइसेंस दिया जायगा नर बकरे काटने के लाइसेंस दिए जायेंगे