तेरापंथ धर्म संघ के वरिष्ठ संत मुनि प्रसन्न कुमार जी स्वामी का भीलवाड़ा में देवलोकगमन; देशभर में शोक की लहर
भीलवाड़ा (पप्पू लाल कीर) तेरापंथ धर्म संघ के वरिष्ठ एवं समर्पित साधक मुनि श्री प्रसन्न कुमार जी स्वामी के देवलोकगमन के समाचार से समूचे मेवाड़ प्रदेश सहित देशभर के श्रद्धालुओं में शोक की लहर दौड़ गई है। मुनि श्री ने भीलवाड़ा में अपनी सांसारिक यात्रा पूर्ण करते हुए अंतिम सांस ली। उनके महाप्रयाण को धर्म संघ और आध्यात्मिक जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया जा रहा है।
मुनि श्री ने लगभग 24 वर्ष की युवावस्था में संसार की मोह-माया का त्याग कर संन्यास पथ को अपनाया था। पिछले 48 वर्षों से वे निरंतर संयम, तपस्या और कठोर साधना के पथ पर अग्रसर थे। उनका जीवन अनुशासन की एक खुली पुस्तक था, जिसने हजारों श्रावक-श्राविकाओं को अध्यात्म की ओर प्रेरित किया।
मुनि श्री संकल्प के धनी थे। उन्होंने आचार्य श्री तुलसी, आचार्य श्री महाप्रज्ञ एवं वर्तमान अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी के मार्गदर्शन में कन्याकुमारी से लेकर पंजाब तक देश के विभिन्न प्रांतों में लंबी पदयात्राएं कीं। इन यात्राओं के माध्यम से उन्होंने व्यसन मुक्ति, आध्यात्मिक जागरण और मानवीय मूल्यों का संदेश जन-जन तक पहुँचाया।
मुनि श्री के जीवन का सबसे प्रेरक पहलू उनकी सहनशीलता रही। शारीरिक व्याधियों और कष्टों के बावजूद उन्होंने कभी अपनी पीड़ा को चेहरे पर प्रकट नहीं होने दिया और अपनी साधना में निरंतर लीन रहे। उनकी निष्ठा और गुरुभक्ति अटूट थी।
मुनि श्री के परिवार ने शासन सेवा में अनूठा योगदान दिया है। उनके परिवार से तीन भाइयों ने दीक्षा ग्रहण कर जैन संत परंपरा को गौरवान्वित किया, जिनमें मुनि संजय कुमार जी स्वामी, मुनि प्रकाश कुमार जी स्वामी और स्वयं मुनि प्रसन्न कुमार जी स्वामी शामिल हैं।
मुनि श्री के देवलोकगमन पर विभिन्न सामाजिक संगठनों, संत समाज और श्रावक समाज ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। श्रद्धालुओं ने उन्हें एक "संकल्प के धनी" और "अनुशासन प्रिय" संत के रूप में याद करते हुए अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।


