झुंझुनूं की शादी बनी मिसाल, सादगी और संस्कार को दी प्राथमिकता; बिना दहेज के हुआ विवाह, ‘वस्त्र व्यवहार’ जैसी परंपरा का भी त्याग
झुन्झुनू (सुमेरसिंह राव) झुन्झुनू शहर में एक ऐसी शादी संपन्न हुई। जिसने परंपराओं के नाम पर चल रही कई सामाजिक कुरीतियों को पीछे छोड़ते हुए समाज को नई दिशा देने का काम किया। आमतौर पर राजपूत समाज की शादियों में जहां खाने के साथ शराब और नॉनवेज को परंपरा का हिस्सा माना जाता रहा है। वहीं इस विवाह समारोह में इन सभी चीजों से पूरी तरह दूरी बनाकर एक सकारात्मक संदेश दिया गया।
स्त्री शक्ति महिला समूह की संयोजिका एवं सामाजिक कार्यकर्ता ललित राठौड़ और व्यवसायी कुंवर वीरेंद्र सिंह शेखावत ने अपने पुत्र बुद्धदेव सिंह शेखावत की शादी को सादगी, संस्कार और समाज सुधार का उदाहरण बना दिया। इस विवाह में न तो शराब परोसी गई और न ही नॉनवेज भोजन रखा गया। इतना ही नहीं, वर्षों से चली आ रही ‘वस्त्र व्यवहार’ जैसी परंपरा को भी त्याग दिया गया। जिससे अनावश्यक सामाजिक दबाव को खत्म करने की पहल दिखाई दी।
सबसे प्रेरणादायक पहल रही—दहेज प्रथा का पूर्ण बहिष्कार। दोनों परिवारों ने मिलकर यह साबित किया कि रिश्तों की नींव लेन-देन पर नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और संस्कारों पर टिकी होती है। शादी के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए दूल्हा—दुल्हन की अगुवाई में 100 पौधे लगाए गए और उनकी देखरेख का संकल्प लिया गया। जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरित संदेश है। भात में प्राप्त 1 लाख 13 हजार रुपये की राशि को भी निजी उपयोग में न लेते हुए बालिका शिक्षा के लिए दान कर दिया गया। यह कदम न केवल शिक्षा के महत्व को दर्शाता है, बल्कि समाज में बेटियों के सशक्तिकरण का मजबूत संदेश भी देता है। यह विवाह लादड़िया डीडवाना निवासी मंजू कंवर और ठाकुर सुरेंद्र सिंह राठौड़ की सुपुत्री डॉ. सिमरन राठौड़ के साथ संपन्न हुआ।
पूरे झुंझुनूं जिले में इस अनूठी और संदेशपरक शादी की सराहना हो रही है। वर पक्ष की ओर से की गई इस पहल को स्वागत वधु पक्ष ने भी किया। उन्होंने भी वस्त्र व्यवहार को ना किया। साथ ही मास—मदिरा निषेध का पालन किया। इस शादी में पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार, पूर्व आईजी सुरेंद्र सिंह शेखावत, पुरस्कृत आरईएस मोहनसिंह प्यांवा, आरईएस किशनसिंह राठौड़, एडवोकेट गोविंदसिंह राठौड़, श्री शार्दुल एजुकेशन ट्रस्ट के सचिव बजरंगसिंह शेखावत, पूर्व विधायक डॉ. मूलसिंह शेखावत आदि शामिल हुए। जिन्होंने इस पहल की प्रशंसा की।
वहीं परिवार ने राजस्थान एजुकेशन बोर्ड के पूर्व सेक्रेट्री सवाई सिंह शेखावत को इस कार्य के लिए प्रेरणास्त्रोत बताया। यह शादी सिर्फ दो परिवारों का मिलन नहीं, बल्कि एक सोच का बदलाव है—जहां दिखावे की जगह सादगी, कुरीतियों की जगह संस्कार और परंपराओं के नाम पर बोझ की जगह समाज के प्रति जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी गई। ऐसी पहलें निश्चित रूप से समाज को नई दिशा देने में मील का पत्थर साबित होंगी।