मानगढ़ धाम को 'राष्ट्रीय स्मारक' घोषित करने की उठी मांग: झुंझुनूं में आदिवासी समाज ने जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
उदयपुरवाटी (झुंझुनूं) | सुमेर सिंह राव
ऐतिहासिक मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की वर्षों पुरानी मांग को लेकर आदिवासी समाज ने लामबंद होकर झुंझुनूं जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री व केंद्र सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन आदिवासी कांग्रेस के जिलाध्यक्ष रतन मीणा जोधपुरा के नेतृत्व में दिया गया।
जलियांवाला बाग से पहले हुआ था भयावह नरसंहार ज्ञापन सौंपने के दौरान वक्ताओं ने मानगढ़ धाम के गौरवशाली व बलिदान से भरे इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 17 नवंबर 1913 को महान समाज सुधारक गोविंद गुरु के नेतृत्व में 1 लाख 50 हजार से अधिक आदिवासी औपनिवेशिक अत्याचारों, अनुचित करों और जबरन बंधुआ मजदूरी के विरोध में मानगढ़ की पहाड़ी पर एकत्रित हुए थे। ब्रिटिश हुकूमत ने निहत्थे आदिवासियों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं, जिसमें 1500 से अधिक आदिवासी वीर सेनानी शहीद हो गए थे। यह भयावह नरसंहार प्रसिद्ध जलियांवाला बाग हत्याकांड से भी वर्षों पहले हुआ था।
केंद्रीय मंत्री के बयान के बाद उपजा असंतोष प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि हाल ही में एक केंद्रीय मंत्री द्वारा दिए गए विवादित बयान के कारण समाज में गहरा असंतोष और विवाद की स्थिति पैदा हुई है। इसके विरोध स्वरूप और मानगढ़ धाम को उसका वास्तविक ऐतिहासिक दर्जा दिलाने के लिए समाज ने पुरजोर तरीके से इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग दोहराई है।
ये रहे उपस्थित इस दौरान पूर्व जिलाध्यक्ष बनवारी लाल मीणा, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष रामचंद्र मीणा, जिला प्रवक्ता एडवोकेट धर्मवीर मीणा, उपाध्यक्ष रामकुमार सिंह मीणा (भीमसर), रोहिताश मीणा (भौड़की), दयानंद मीणा, ओमप्रकाश मीणा, राजेश मीणा, जयपाल सिंह मीणा, नवीन मीणा, कृष्ण कांत मीणा सहित भारी संख्या में आदिवासी समाज के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

