पीएम सूर्य घर व कुसुम योजना से बदली तस्वीर; भरतपुर बना सौर ऊर्जा का उभरता मॉडल, सैकड़ों घरों का बिजली बिल शून्य
भरतपुर, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) राजस्थान में ऊर्जा आत्मनिर्भरता और हरित विकास की दिशा में भरतपुर जिला तेजी से नई पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेशभर में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए चलाया जा रहा अभियान अब जमीनी स्तर पर प्रभाव दिखाने लगा है। सरकारी और निजी भवनों की छतों पर सोलर प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे न केवल बिजली बिलों में भारी कमी आई है बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी ठोस कदम उठे हैं।
21 मेगावाट रूफटॉप सोलर का लक्ष्य, तेजी से बढ़ता काम-
अधीक्षण अभियन्ता विद्युत विभाग रामहेत मीणा ने बताया कि जिले में 21 मेगावाट क्षमता के रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसे 10, 5 और 6 मेगावाट के तीन चरणों में बांटकर विभिन्न एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासन द्वारा निरंतर मॉनिटरिंग के चलते कार्य गति पकड़ रहा है। भरतपुर मुख्यालय के साथ नदबई, वैर, उच्चैन, बयाना, रूपवास और छौंकरवाड़ा क्षेत्रों में 1928 सरकारी भवनों की पहचान की गई है। इनमें से अब तक 20 भवनों पर 0.84 मेगावाट क्षमता के सोलर संयंत्र स्थापित हो चुके हैं, जबकि 60 भवनों पर कार्य प्रगति पर है।
पीएम कुसुम योजना किसानों के लिए वरदान-
अधीक्षण अभियन्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत भी भरतपुर में सौर ऊर्जा का विस्तार तेजी से हो रहा है। जिले में अब तक 5 सोलर प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं जिसमें बयाना के ब्रह्मबाद में 2, नदबई के बरौलीछार में 1 तथा वैर के धरसोनी और पथेना में 1-1 प्लांट लगाए गए हैं। कुसुम-बी योजना के तहत वर्ष 2024-25 में 52 कनेक्शन जारी किए गए, जबकि 2025-26 में 19 नए कनेक्शनों की प्रक्रिया जारी है। यह योजना किसानों को सौर ऊर्जा से जोड़ते हुए सिंचाई लागत को कम करने और आय बढ़ाने में सहायक बन रही है।
पीएम सूर्य घर योजना 1397 घरों में आई रोशनी-
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने आमजन के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। जिले में अब तक 1397 घरों का बिजली बिल शून्य हो चुका है। छतों पर लगे सोलर पैनल न केवल बिजली की जरूरत पूरी कर रहे हैं, बल्कि अतिरिक्त बिजली उत्पादन की संभावनाएं भी बढ़ा रहे हैं। आसान और किफायती सोलर सिस्टम-
उन्होंने बताया कि सरकार ने सोलर सिस्टम को आमजन के लिए सरल और सुलभ बनाया है। 3 किलोवाट तक के सिस्टम पर 40-60 प्रतिशत तक सब्सिडी मात्र 6 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण सुविधा प्रदान की जा रही हैं, जिसके तहत 1 किलोवाट पर 30 हजार रूपये, 2 किलोवाट पर 60 हजार रूपये और 3 किलोवाट या अधिक पर 78 हजार रूपये तक सब्सिडी इन प्रोत्साहनों के कारण आम लोग तेजी से सौर ऊर्जा की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
हरित भविष्य की ओर बढ़ता भरतपुर-
भरतपुर अब सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक मॉडल जिले के रूप में उभर रहा है। यह पहल न केवल बिजली बिलों को शून्य करने में मददगार साबित हो रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी नई दिशा दे रही है। आने वाले समय में भरतपुर का यह मॉडल पूरे राजस्थान के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा और हरित ऊर्जा क्रांति को नई गति देगा।