पावापुरी तीर्थ सहित पूरे जिले में भगवान महावीर का जन्म कल्याणक उल्लास पूर्वक मनाया गया
सिरोही (राजस्थान) अहिंसा के पुजारी व जिओ ओर जीने दो का संदेश देने वाले भगवान महावीर का आज सिरोही जिले में जन्म कल्याणक एक उत्सव के रूप में हर्षौल्लास के साथ मनाया गया।
बिहार पावापुरी के तर्ज पर राजस्थान के सिरोही जिले की देव भूमि में बने ’’श्री पावापुरी तीर्थ जीव मैत्री धाम में आचार्य भगवंत जयेशरत्नसूरीजी मसा की पावन निश्रा में शुभ वरघोड़ा निकाला गया जिसमें ’’ त्रिशला नंदन वीर की जय बोलो महावीर की ’’ जयनाद करते हुए व नाचते गाजते बजाते लोग शामिल हुए और महिलाए त्रिशला माता को सपने में आए 14 रजत स्वप्न लेकर चल रही थी। तीर्थ के प्रबंधक सुरेंद्र जैन ने बताया कि वरघोड़े में स्कूली बच्चे, घोड़े, ऊंट, बैटरी चलित वाहन, तीर्थ में कार्यरत स्टाफ, ओली के तपस्वी, भगवान का रथ एवं चतुर्विद् संघ शामिल था। वरघोड़ा जल मंदिर पहुंचा जहा सभी ने चोमुखा महावीर स्वामी के दर्शन वंदन व पूजा अर्चना की। यहां सभी को मोतीचूर के लड्डू से मुंह मीठा कराया गया।
महावीर की वाणी आज भी शांति का संदेश देती हैं: आचार्य जयेशरत्न
पावापुरी उपाश्रय में आचार्य भगवंत जयेशरत्नसुरीजी ने कहा कि भगवान महावीर का जीवन समस्त मानव जाति के लिए प्रेरणा का दिव्य स्त्रोत है। उनका जन्म कल्याणक केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मजागरण, आत्मसंयम और आत्मोन्नति का संदेश देने वाला पावन अवसर है। उन्होंने अपने तप, त्याग और आदर्शों से यह सिद्ध किया कि सत्य, अहिंसा और संयम के मार्ग पर चलकर मनुष्य अपने जीवन को श्रेष्ठतम बना सकता है।
महावीर स्वामी का महान सिद्धांत “अहिंसा परमो धर्म” आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था। यह केवल शारीरिक हिंसा से बचने की बात नहीं करता, बल्कि विचारों, वाणी और व्यवहार में भी करुणा, सहिष्णुता और संवेदनशीलता अपनाने की प्रेरणा देता है।
आज जब मानव जीवन भागदौड़, प्रतिस्पर्धा और मानसिक तनाव से घिरा हुआ है, तब उनका यह संदेश हमारे लिए मार्गदर्शक दीपक के समान है। उन्होंने सत्य, अपरिग्रह और संयम का जो मार्ग दिखाया, वह जीवन को सरल, संतुलित और शांत बनाता है। यदि हम अपनी इच्छाओं को सीमित कर संतोष को अपनाएं, तो वास्तविक सुख और आंतरिक शांति प्राप्त कर सकते हैं।
उनका जीवन यह भी सिखाता है कि धैर्य, सहनशीलता और आत्मनियंत्रण के बल पर ही मनुष्य कठिन से कठिन परिस्थितियों को पार कर सकता है।
आचार्यश्री ने कहा आज के इस वैश्विक परिवेश में, जहाँ विभिन्न देशों के बीच तनाव, संघर्ष और युद्ध के हैं परस्पर युद्ध जारी है, महा विनाश हो रहा है वहाँ भगवान महावीर स्वामीजी का अहिंसा और शांति का संदेश सम्पूर्ण मानवता के लिए अमृततुल्य है।
माउंट आबू में आज जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक दिवस पर आचार्य भाग्येशरत्नसुरीश्वर व आचार्य कल्पयशरत्नसूरीजी महाराज की निश्रा मे आयोजित शोभा यात्रा नूतन यात्री आवास से प्रारम्भ होकर देलवाडा आबूपर्वत के मुख्य मार्ग पर होकर विश्व विख्यात अतिप्राचीन जैन श्वेतांबर मन्दिर देलवाडा मे हर्षोल्लास के साथ जयघोष के साथ प्रवेश करने पर प्रबन्धक गोरधनसिंह व विजय कुमार जैन द्वारा मुख्य द्वार पर स्वागत किया, शोभा यात्रा मे साधु भगवन्तो व साध्वी जी महाराज साहेब के साथ नवपद आंयबील ओलीजी के 200 आराधको ने 14 रजत सपनो को अपने मस्तक पर धारण कर व भगवान महावीर स्वामी की स्वर्ण प्रतिमा की पालकी के साथ मन्दिर प्रांगण मे प्रवेश किया। सभी आराधकों ने मन्दिर मे भगवान महावीर स्वामी के दर्शन पुजा अर्चना कर गुरु भगवन्तो के आशीर्वाद प्राप्त किये।
इस अवसर पर आचार्य भाग्येशरत्न सूरीजी ने अपने प्रवचन मे भगवान महावीर स्वामी द्वारा प्रतिपादित अंहिसा के सिद्धांत के सन्दर्भ मे विश्व की वर्तमान युद्ध की स्थिति के परिपेक्ष्य मे उत्पन्न राग-द्वेष को अंहिसा व करुणा के भावो को अंगीकार कर सभी जीवों के प्रति मैत्री भाव रखने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
मंडार में मुनिराज भव्यविजय जी की निश्रा में महावीर जन्म कल्याणक का भव्य आयोजन श्रावक श्राविकाओं ने मनाया और परमात्मा के दिए गए संदेश को अपने आचरण में लाकर जीवन को धन्य बनाने का संकल्प किया। मुनिराज ने कहा कि परमात्मा ने जो मार्ग बताया यानि किसी को ठेस नहीं पहुंचाना ओर सबको अपने ढंग से जीने देने की बात कही थी वो आज भी प्रासंगिक है। ओली आराधकों को ज्ञान दर्शन व चारित्र की पूरी व्याख्या समझाते हुए बताया गया कि इसी रास्ते से मोक्ष की प्राप्ति हो सकती हे। सिरोही जिले में भगवान महावीर स्वामी के प्राचीन जिनालयों मुगथला, वरमान, दियाँना, अजारी, बामनवाड़ा, नादिया, बालदा एवं थुंब की वाडी में भी पूजा दर्शन के लिए भक्तजन पहुंचे ओर मंदिरों में सजावट व दीपक रोशनी की गई।