विश्व नवकार महामंत्र दिवस पर महामंत्र का सामूहिक रूप में किया जाप
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन) आज 9 अप्रैल को विश्व कल्याण एवं विश्व शांति हेतु महामंगलकारी नवकार महामंत्र का समारोह पूर्वक प्रातः 8:00 बजे से 10:00 बजे तक श्री सम्भवनाथ श्वेतांबर जैन मंदिर बिचगांवा में विश्व कल्याण एवं विश्व शांति के लिए आज सामूहिक नवकार महामंत्र का जाप सभी साधर्मिक भाई-बहनों ने बड़े ही हर्षोल्लास एवं उत्साह पूर्वक किया।
इधर कस्बे की केशवानंद शिक्षण संस्थान में विश्व नवकार महामंत्र दिवस पर विद्यालय में छात्र-छात्राओं द्वारा सामूहिक रूप से विश्व शांति एवं कल्याण हेतु नवकार महामंत्र का जाप किया गया।
अखिल भारतीय श्वेतांबर पल्लीवाल महासंघ के मनोनीत सदस्य प्रदीप कुमार जैन बिचगावा ने बताया कि नवकार मंत्र की अदभुत महिमा केवल जाप की उद्घोषणा से ही दुनिया में शांति का बिगुल बज गया। 9 अप्रैल के पूर्व ही युद्ध विराम हो गया। नवकार सभी मंत्रों का राजा महामंत्र कहलाता है ।आज हम सभी ने मिलकर अरिहंत प्रभु के शरण में नवकार मंत्र का जाप कर विश्व कल्याण और भविष्य में विश्व शांति के लिए आह्वान किया।
आज के पावन दिन एक अद्भुत आध्यात्मिक इतिहास रचने जा रहा है—
जब 108 देशों में एक साथ नवकार महामंत्र की दिव्य ध्वनि गूंजेगी। यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा से परमात्मा की ओर उठता हुआ सामूहिक संकल्प है शुद्धि, शांति और शक्ति का वैश्विक महायज्ञ है
नवकार महामंत्र – चौदह पूर्व का सार यह महामंत्र किसी नाम या रूप की नहीं,बल्कि गुणों की वंदना का अद्भुत सूत्र है।
इसकी महिमा अपरम्पार है—
दुःख में धैर्य देता है , सुख में संतुलन बनाए रखता है , रोग में मानसिक शक्ति देता है , संकट में सुरक्षा का अनुभव कराता है , अनिश्चित और अजनबी स्थानों में भी आत्मविश्वास जगाता है
यह मंत्र जीवन के हर क्षण में उपयोगी है—
हर कार्य की शुरुआत से पहले , सोते समय और जागते ही , कषाय के तीव्र क्षणों में , वैराग्य और कर्मक्षय की साधना णमोकार मंत्र के जाप से होती है ।
सामूहिक जाप – दिव्य ऊर्जा का विस्तार
जब हजारों-लाखों आत्माएं एक साथ नवकार का जप करती हैं, तब—वातावरण में अलौकिक शुद्धता उत्पन्न होती है सकारात्मक ऊर्जा का विशाल प्रवाह फैलता है सामूहिक चेतना उच्च स्तर पर पहुंचती है और आत्मा को अद्भुत शांति व स्थिरता प्राप्त होती है यह अनुभव शब्दों से परे, केवल अनुभूति का विषय है।
जप से सिद्धि तक – अभ्यास की यात्रा नवकार मंत्र का निरंतर अभ्यास—पहले वाचिक जप(शब्दों से),फिर मानसिक जप (मन से),और अंततः अस्थिमज्जा जप (स्वभाव से) तक पहुंचाता है। जब जप स्वभाव बन जाता है,तब आत्मा स्वतः उच्च आध्यात्मिक कक्षा में प्रतिष्ठित हो जाती है।


