आस्था का सैलाब: श्री कारिस देव बाबा मेले में उमड़ा जनसैलाब, अब तक सवा लाख श्रद्धालुओं ने टेका मत्था
भुसावर (विष्णु मित्तल) अरावली पर्वतमाला की सुरम्य पहाड़ियों और घने जंगलों के मध्य स्थित गाँव जहाज में श्री कारिस देव बाबा का वार्षिक मेला इन दिनों पूरे परवान पर है। 4 अप्रैल से शुरू हुए इस मेले में श्रद्धालुओं की अटूट आस्था हिंसक जानवरों के भय पर भारी पड़ रही है। हथौड़ी-बल्लभगढ़ मार्ग से मंदिर तक के 6 किलोमीटर के रास्ते पर पैदल यात्रियों और वाहनों का तांता लगा हुआ है।
मेला कमेटी के प्रवक्ता खूबीराम गोठिया एवं ग्राम पंचायत हथौड़ी के सरपंच फत्ते सिंह गुर्जर ने बताया कि मेले के शुरुआती सात दिनों में ही 1 लाख 28 हजार से अधिक श्रद्धालु देव बाबा के दरबार में मत्था टेक चुके हैं। दर्शनार्थियों में राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के भक्त शामिल हैं। धौलपुर, करौली, आगरा और फरीदाबाद से बड़ी संख्या में पदयात्री जत्थों के रूप में पहुँच रहे हैं।
श्रद्धालु समुद्र तल से करीब 2800 फीट की ऊँचाई पर स्थित हजारों साल पुराने झरने और शीतल कुण्ड में डुबकी लगाकर प्रकृति का आनंद ले रहे हैं। मान्यता है कि यहाँ स्नान के बाद देव बाबा के दर्शन करने से परिवार में खुशहाली आती है। श्रद्धालु यहाँ नवविवाहित जोड़ों की जात और नवजात शिशुओं के मुंडन संस्कार जैसे मांगलिक कार्य भी संपन्न कर रहे हैं।
स्थानीय बुजुर्ग प्रताप सिंह गुर्जर और सेवाराम बताते हैं कि देव बाबा को भगवान शिव का अवतार माना जाता है। वे पशुपालकों, असहायों और वन्यजीवों के रक्षक थे। मंदिर घने जंगल में होने के बावजूद, जहाँ हिंसक और जहरीले जीव रहते हैं, बाबा की कृपा से मेले के दौरान आज तक कोई अनहोनी नहीं हुई है।
मेले में श्रद्धालुओं द्वारा देशी घी और बेसन के मालपुए, चूरमा-बाटी और खीर-पूए का विशेष भोग लगाया जा रहा है। बाबा के सेवक तोताराम प्रधान ने बताया कि बाबा को शुद्ध देशी घी और आटे से बने पकवान अत्यंत प्रिय हैं, जिसे भक्त प्रसादी के रूप में वितरित कर रहे हैं।

