उपराष्ट्रपति भवन में भव्य समारोह में किया गया सिंधी भाषा में संविधान पुस्तक का विमोचन
भीलवाड़ा (राजकुमार गोयल) 10 अप्रेल को संविधान के सिन्धी भाषा मे प्रकाशित पुस्तक कार्यक्रम का विमोचन सिंधी भाषा दिवस के उपलक्ष में नई दिल्ली में उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में उपराष्ट्रपति राधकृष्णन विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी एवं केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल सांसद शंकर लालवानी के द्वारा किया गया।। आज ही के दिन 10 अप्रेल 1967 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सिंधी भाषा को मान्यता दिलवाई थी।
भाजपा नेता विनोद झुरानी ने बताया कि भारतीय संविधान को देश के हर नागरिक तक उसकी मातृभाषा में पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्र सरकार द्वारा संविधान का सिंधी भाषा में अनुवाद किया गया है। यह ऎतिहासिक पहल भाषाई समावेशन को बढ़ावा देने के साथ-साथ संविधान की मूल भावना को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है। उप राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन 10 अप्रैल को संविधान की सिंधी भाषा में अनुवादित प्रति का विमोचन किया
विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने कहा कि संविधान का यह अनुवाद माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उस सोच का परिणाम है, जिसमें देश की विविध भाषाओं में संविधान को उपलब्ध कराने पर बल दिया गया है। इसी क्रम में आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में संविधान के अद्यतन संस्करण तैयार किए जा रहे हैं। सिंधी भाषा में संविधान उपलब्ध होने से देशभर के एक करोड़ सिंधी भाषी समुदाय को अपने अधिकारों और कर्तव्यों को बेहतर ढंग से समझने में सहायता मिलेगी।
संविधान का यह संस्करण देवनागरी एवं फारसी दोनों लिपियों में उपलब्ध कराया गया।जिससे अधिकाधिक लोगों तक इसकी पहुंच सुनिश्चित हो सके।
इस अवसर पर अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे व साथ ही बड़ी संख्या में सिंधी समाज के प्रतिनिधि भी इस ऎतिहासिक क्षण के साक्षी बनें।
सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय की यह पहल ‘विकसित भारत@2047’ के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल भाषाई विविधता को सम्मान मिलेगा, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों को और अधिक मजबूत करने में भी सहायता मिलेगी। सरकार का यह प्रयास संविधान को जन-जन तक पहुंचाने और प्रत्येक नागरिक को जागरूक एवं सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि यह केन्द्र सरकार की ओर से एक करोड़ सिंधी भाषियों के लिए बड़ा तोहफा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के प्रत्येक वर्ग एवं भाषा को साथ लेकर चलने की सोच रखते हैं। यह पहल माननीय प्रधानमंत्री की दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जिनके नेतृत्व में संविधान को देश की सभी भाषाओं में सुलभ बनाने का प्रयास किया जा रहा है। भारतीय संविधान का सिंधी भाषा में अनुवाद देश की समृद्ध भाषाई विविधता और समावेशी भावना का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि सिंधी समाज के लोगों के लिए यह गर्व का क्षण है। सिंधी भाषा में संविधान उपलब्ध होने से देशभर के सिंधी भाषी समाज को अपने अधिकारों और कर्तव्यों को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिलेगा। यह कदम न केवल लोकतंत्र को मजबूत करेगा, बल्कि संविधान की मूल भावना को जन-जन तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

