जिंदगी का परिणाम बदलना है तो प्रणाम करना प्रारंभ कर दो- पंडित प्रदीप मिश्रा
भीलवाड़ा (राजकुमार गोयल) मेवाड़ की पावन धरा भीलवाड़ा की भूमि पर श्री महाशिवपुराण कथा का श्रवण कराने पहली बार पधारे प्रख्यात कथावाचक ‘कुबेर भण्डारी’ पंडित प्रदीप मिश्रा के मुखारबिंद से कथा सुनने के लिए जनमैदिनी का सैलाब दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। हालात ये हो गए है कि सात दिवसीय कथा के तीसरे दिन शुक्रवार को मेडिसिटी ग्राउण्ड के साढ़े चार लाख वर्ग फीट में फैले डोम ओर पाइप पांडाल ओर उसके बाहरी क्षेत्र में भी श्रद्धालुओं को बैठने की जगह मिलना मुश्किल हो गया था। आस्था से ओतप्रोत सैकड़ो श्रद्धालु मेडिसिटी ग्राउण्ड के बाहर भी खड़े होकर तल्लीनता से कथा श्रवण कर रहे थे। संकटमोचन हनुमान मंदिर के महन्त बाबूगिरीजी महाराज के सानिध्य में हो रही कथा के तीसरे दिन पंडित प्रदीप मिश्रा ने शिव महापुराण के प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि यदि अपनी जिंदगी का परिणाम बदलना है तो प्रणाम करना प्रारंभ कर दो। हम श्री शिवाय नमस्तुभयं के माध्यम से भी भोले बाबा को बार-बार प्रणाम करते है।
प्रणाम करने से दुःख हटकर सुख आना प्रारंभ हो जाता है। संसार में पूजनीय बनने के लिए पूजन करना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हमारी आस्था ही पत्थर की मूर्ति को भगवान बनाती है। जब तक हमारा मन नहीं बदलेगा हम घर में कितना भी बदलाव कर ले शांति नहीं मिलेगी। जीवन में संत बनना सरल पर गृहस्थ बनना कठिन होता है। पारिवारिक झंझटो के बीच भगवान का भजन करना कठिन होता। महाराजश्री ने कहा कि भीलवाड़ावासी भाग्यशाली है कि घरेलु व्यस्तता के बीच भी प्रतिदिन तीन घंटे का समय निकाल कथा श्रवण करने आ रहे है। भाव हो तो भगवान को भी आना पड़ता है। अपने भावों को परमात्मा से जोड़ने को उपवास कहते है। नयन, इन्द्रियों,वाणी, जिव्हा व श्रवण का संयम रखने पर भगवान शिव की कृपा होती है। कथा के तीसरे दिन कथा के प्रारंभ में व्यास पीठ पर विराजित पंडित मिश्रा का अभिनंदन करने वालों में हरिशेवाधाम भीलवाड़ा के महामंडलेश्वर हंसारामजी महाराज, पंचमुखी दरबार के महन्त लक्ष्मणदास त्यागी आदि शामिल थे।
स्वायत शासन मंत्री झाबरसिंह खर्रा एवं विधायक गोपाल खण्डेलवाल ने व्यास पीठ पर विराजित पंडित प्रदीप मिश्रा का अभिनंदन कर आशीर्वाद लिया। तीसरे दिन की प्रातःकालीन पूजा एवं कथा विश्राम पर व्यास पीठ की आरती करने वालों में जजमान गोपाल राठी, अशोक बाहेती, रामेश्वरलाल काबरा, भैरूलाल जागेटिया, राधेश्याम चेचाणी, विनीत अग्रवाल, कन्हैयालाल नैना स्वर्णकार, राजेश कुदाल, रजनीकांत आचार्य, गोपी पाटोदिया, केसी प्रहलादका, रामेश्वरलाल ईनाणी, बद्रीलाल सोमानी, अनिल दाधीच, निर्मल जोशी, पवन नागौरी, अलका गोपाल जोशी, जगदीश वैष्णव, जानकीलाल सुवालका आदि शामिल थे। अतिथियों का स्वागत आयोजन समिति के अध्यक्ष विधायक अशोक कोठारी ने किया। आभार आयोजन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष राधेश्याम सोमानी ने जताया। कथा समिति के संयोजक गजानंद बजाज ने बताया कि कथा 14 अप्रेल तक प्रतिदिन दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक होगी। कथा पांडाल में श्रद्धालु के लिए सभी जरूरी प्रबंध किए गए है।
- जो माता-पिता से छुपकर खाते है वह चोर है
कथा में पंडित प्रदीप मिश्रा ने युवाओं को बुर्जुग माता-पिता की सेवा ओर उनकी इच्छाओं का सम्मान करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि बच्चें ओर बुर्जुग एक समान होते है। खाने का जो सामान बच्चों के लिए लाते उसके लिए बुर्जुग माता पिता से भी पूछे उनकी भी इच्छा होती है। जो मां-बाप से छुपाकर खाते है वह चोर होते है। बाजार में खाते है तो थोड़ा घर पर आपका इन्तजार कर रहे बुर्जुग माता-पिता के लिए भी ले जाए। माता-पिता की दुआएं ही जिंदगी में सफलता का आधार होती है। बच्चों ओर बुढ़ों की सेवा करने वालों को भगवान भी आशीर्वाद देते है।
- शिव को जल चढ़ाओ 33 करोड़ देवी देवता को प्राप्त हो जाएगा
कथा में पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि केवल दो ही देवता भगवान शिव ओर सूर्यदेव को ही नियमित जल चढ़ता है। बाकी देवी देवताओं का अवसर विशेष होने पर जलाभिषेक किया जाता है। भगवान शिव देवाधिदेव होने से उनको जल चढ़ाने पर सभी 33 करोड़ देवी देवता को प्राप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि श्रद्धा के साथ देवाधिदेव महादेव को प्रतिदिन एक लोटा जल चढ़ाने से वास्तुदोष, पितृदोष ओर कालसर्प दोष भी दूर हो जाते है। इन दोषों को दूर करना है तो शिव मंदिर में जल चढ़ाओ ओर भगवान से मन की बात कहे सारे कष्ट दूर हो जाएंगे। मन का विश्वास ओर दृढ़ता भगवान के करीब ले जाती है।
- तेरे डमरू की धुन सुनकर मैं काशी नगरिया आई हूं पर झूमे हजारों श्रद्धालु
कथा के दौरान मंच से तेरे डमरू की धुन सुनकर में काशी नगरिया आई, महादेव चरणों में वंदन स्वीकार कीजिए जैसे भजन गाए गए तो हजारों महिला श्रद्धालु अपने-अपने स्थानों पर खड़ा होकर झूमती रही। पांडाल के अंदर हो या बाहर हर तरफ भक्ति से ओतप्रोत श्रद्धालु ऐसे भजनों की रसगंगा में डूबे नजर आए। कथा के दौरान मंच से पंडित मिश्रा ने कुछ श्रद्धालुओं के पत्र पढ़े जिसमें बताया गया था कि उनकी समस्याओं का निदान किस तरह शिव भक्ति से हुआ। ऐसे श्रद्धालुओं को परिवार सहित मंच पर भी बुला पंडित मिश्रा ने अपने हाथों से बिल्व पत्र प्रदान किया। जिन श्रद्धालुओं के पत्र पढ़ उनमें भीलवाड़ा निवासी मंजू पाटोदिया, नेगड़िया निवासी प्रियंका शर्मा, बंबोरी निवासी पप्पू कंवर, बनकोड़ा निवासी सुनीता सोनी, मानपुरा निवासी किरण बारेठ आदि शामिल थे।
- कथास्थल पर कीमती आभूषण पहन कर नहीं आए श्रद्धालु
श्री शिव महापुराण कथा आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि परेशानी से बचने के लिए समय पूर्व अपना स्थान ग्रहण कर ले। कथा स्थल पर पेयजल व जरूरी सुविधाओं का प्रबंध किया गया है। श्रद्धालुओं से पीने के जल की बोतल साथ रखने का आग्रह किया गया है। कथा के दौरान श्रद्धालुओं से सोना चांदी के कीमती आभूषण नहीं पहन कर आने की अपील निरन्तर की जा रही है। श्रद्धालुओं से मोबाइल, पर्स आदि कीमती सामग्री का ध्यान भी रखने का निवेदन किया जा रहा है। कथा सुनने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के वाहन पार्किंग एवं आगमन निकासी को लेकर विशेष प्रबंध किए गए है।
- श्रद्धालुओं की सेवा की लग रही होड़
श्री शिव महापुराण कथा सुनने के लिए भीलवाड़ा ही नहीं मेवाड़ व राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिदिन पहुंच रहे श्रद्धालुओं की सेवा की भी होड़ लगी हुई है। कथा सुनने के लिए पांडाल में रहने वाले हजारों श्रद्धालुओं के लिए चल रही भोजनशाला में अनाज व खाद्य सामग्री पहुंचाने के लिए भी कई श्रद्धालु आगे आ रहे है। मेडिसिटी ग्राउण्ड की तरफ आने वाले सभी मार्गो पर कई सामाजिक व स्वयंसेवी संगठनो ओर परिवारों द्वारा जल सेवा की जा रही है। कई जगह श्रद्धालुओं से चाय की मनुहार भी की जा रही है। कई श्रद्धालु टॉफी व बिस्कुट बांट कर भी श्रद्धालुओं की सेवा कर रहे है।

