भ्रष्टाचार या लापरवाही? सवा दो लाख की हाई मास्क लाइट सवा दो महीने भी नहीं चली; पहुना चौराया पर अंधेरे का साम्राज्य, ग्रामीणों में ग्राम पंचायत के खिलाफ भारी रोष
कारोई (बद्री लाल माली) कस्बे के मुख्य पहुना चौराया पर विकास के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। लाखों रुपये की लागत से लगाई गई हाई मास्क लाइट महज दो महीने के भीतर ही खराब होकर 'शो-पीस' बन गई है। आलम यह है कि करोड़ों की लागत वाले विकास कार्यों के बीच यह चौराहा रात होते ही अंधेरे के आगोश में डूब जाता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सांसद मद से इस हाई मास्क लाइट के लिए 2 लाख 15 हजार रुपये स्वीकृत किए गए थे, जिसमें से 2 लाख 8 हजार 64 रुपये व्यय किए जा चुके हैं। इतनी बड़ी राशि खर्च करने के बावजूद गुणवत्ता का स्तर यह है कि लाइट लगने के दो माह के भीतर ही जवाब दे गई।
- तकनीकी विफलता और घटिया सामग्री:
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि हाई मास्क लाइट के पोल पर कुल 6 LED लाइटें लगाई गई थीं। गुणवत्ता विहीन सामग्री के कारण इनमें से 4 लाइटें पूरी तरह फ्यूज हो चुकी हैं और मात्र 2 लाइटें टिमटिमा रही हैं, जो चौराहे को रोशन करने में पूरी तरह नाकाम हैं।
ग्रामीणों काआरोप है कि ग्राम पंचायत द्वारा विकास के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। घटिया निर्माण और घटिया बिजली उपकरणों के चलते जनता को मिलने वाली सुविधाओं का कोई औचित्य नहीं निकल रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि:फ्यूज हो चुकी लाइटों को तुरंत बदलकर चौराहे पर रोशनी सुचारू की जाए।


