काटली नदी के पुनर्जीवन की गूँज: एनजीटी के आदेशों की पालना और सीमांकन के लिए उदयपुरवाटी में सौंपा ज्ञापन
उदयपुरवाटी (सुमेरसिंह राव) राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) द्वारा नदी संरक्षण को लेकर पारित आदेशों की पालना सुनिश्चित करने हेतु 'काटली नदी बचाओ जन अभियान' ने अपनी सक्रियता तेज कर दी है। सरस्वती रूरल एन्ड अरबन डवलपमेंट सोसायटी के बैनर तले शुक्रवार को अभियान के सदस्यों ने मुख्यमंत्री के नाम उपखण्ड अधिकारी एवं तहसीलदार उदयपुरवाटी को मांगपत्र सौंपा।
अभियान के उदयपुरवाटी संयोजक दीपक मीणा बाघोली ने बताया कि ज्ञापन के माध्यम से काटली नदी एवं इसकी सहायक नदियों व नालों के सीमांकन की मांग की गई है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि सुकली नदी (जहाज मावता), मोजिडा नाला, सांका वाला नाला, जोधपुरा नाला, सोकली नदी (सराय) और सटिण्डा नाला सहित सभी जल स्रोतों को चिन्हित कर उन्हें अतिक्रमण मुक्त करवाया जाए।
अभियान के संयोजक सुभाष कश्यप के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन में अधिकारियों से मांग की गई है कि क्षेत्र के सभी पटवारियों को निर्देशित कर जल स्रोतों की वर्तमान स्थिति और उन पर हुए अवैध कब्जों की विस्तृत रिपोर्ट मंगवाई जाए, ताकि एनजीटी के निर्देशों के तहत प्रभावी कार्यवाही की जा सके।
ज्ञापन में काटली नदी के समग्र विकास और पुनर्जीवन के लिए सिंधु जल को नदी में लाने की महत्वपूर्ण मांग रखी गई। सुभाष कश्यप ने जानकारी दी कि काटली को पुनर्जीवित करने और प्रभावितों के पुनर्वास हेतु जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट कर विस्तृत प्रस्ताव रखा जाएगा।
इस अवसर पर सतीश मिश्रा, धर्मवीर यादव, करण तेतरवाल, धन सिंह कश्यप, एडवोकेट रविन्द्र सिंह, एडवोकेट आंनद सिंह, एडवोकेट मेघराज सैनी सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता और काटली समर्थकों ने हस्ताक्षर कर अपना समर्थन दर्ज कराया।


