साथ जीने-मरने की मिसाल: भीलवाड़ा में 45 साल का रिश्ता, एक ही चिता पर पति-पत्नी की अंतिम विदाई
भीलवाड़ा, (बृजेश शर्मा) मांडल कस्बे से एक ऐसी मार्मिक घटना सामने आई, जिसने ‘जनम-जनम के साथ’ की कहावत को साकार कर दिया। 45 वर्षों तक हर सुख-दुख में साथ निभाने वाले पति-पत्नी ने एक ही रात में दुनिया को अलविदा कह दिया। उनकी अंतिम यात्रा भी साथ निकली और हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार दोनों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। इस दृश्य ने श्मशान घाट पर मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं।
जानकारी के अनुसार, मांडल कस्बे में तालाब की पाल के नीचे रहने वाले गणेश माली (60) और उनकी पत्नी लाली देवी (57) 17 अप्रैल की शाम रोज की तरह खेत से काम कर घर लौटे थे। दोनों ने साथ मिलकर भोजन बनाया, खाना खाया और सो गए। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उनकी जिंदगी की आखिरी रात होगी।
अगली सुबह जब दोनों खेत पर नहीं पहुंचे, तो उन्हें बुलाने एक युवक उनके घर पहुंचा। दरवाजा अंदर से बंद मिला, जिससे अनहोनी की आशंका हुई। सूचना मिलने पर बेटा महावीर मौके पर पहुंचा और दीवार फांदकर घर के अंदर गया। कमरे में माता-पिता चारपाई पर अचेत पड़े थे। जांच करने पर दोनों की मृत्यु हो चुकी थी।
ग्रामीणों के अनुसार, गणेश माली और लाली देवी के बीच गहरा प्रेम और अटूट संबंध था। वे अक्सर कहा करते थे कि “जिएंगे भी साथ और मरेंगे भी साथ।” कुदरत ने उनकी यह इच्छा भी पूरी कर दी। बिना किसी लंबी बीमारी या तकलीफ के, दोनों ने एक साथ अंतिम सांस ली।
अंतिम यात्रा के दौरान दोनों की अर्थियों को एक साथ बांधा गया और श्मशान घाट तक साथ ले जाया गया। परंपरा के अनुसार एक ही चिता पर दोनों का अंतिम संस्कार किया गया। बेटे महावीर ने भावुक होकर कहा कि उनके माता-पिता ने जीवनभर एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा और अंतिम समय में भी साथ ही गए।
गणेश माली और लाली देवी अपने बेटे के परिवार से अलग रहते थे। करीब 45 साल पहले उनका विवाह हुआ था। परिवार में एक बेटा और दो बेटियां हैं, जिनकी शादियां हो चुकी हैं। पीछे 10 साल का पोता और 3 साल की पोती हैं।
यह घटना न केवल एक परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए भावुक कर देने वाली है—जहां एक रिश्ते ने जीवन के अंत तक साथ निभाने की मिसाल कायम कर दी।


