जिला कलक्टर ने स्कूलों का औचक निरीक्षण कर मिड डे मील की गुणवत्ता परखा, विद्यार्थियों से किया संवाद
भरतपुर, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) जिला कलक्टर कमर चौधरी ने सेवर पंचायत समिति क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बांसी एवं महुआ का औचक निरीक्षण कर मिड डे मील योजना की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान जिला कलक्टर ने विद्यालय में विद्यार्थियों को परोसे जा रहे भोजन को स्वयं चखकर उसकी गुणवत्ता, स्वाद एवं स्वच्छता की जांच की। उन्होंने प्रतिदिन दिनवार मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था की जानकारी लेते हुए निर्देश दिए कि निर्धारित मानकों के अनुसार पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन ही विद्यार्थियों को उपलब्ध कराया जाए।
इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद कर मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता, पोषण स्तर एवं नियमितता के बारे में जानकारी ली। साथ ही परीक्षा परिणाम, पढ़ाई की स्थिति तथा विभिन्न शैक्षणिक योजनाओं पर भी चर्चा की।
जिला कलक्टर ने विद्यालय स्टाफ को निर्देशित किया कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ-साथ पोषण पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। निरीक्षण के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी अतुल चतुर्वेदी, बांसी प्रधानाचार्य लोकेश गुप्ता , महुआ प्रधानाचार्य अर्चना कुमारी, व्याख्याता जितेंद्र वशिष्ठ, प्रभाकर शर्मा, ललित कुमार, वरिष्ठ अध्यापक प्रेम शंकर, पंचायत शिक्षक भूपेंद्र सिंह सहित अन्य स्कूल स्टाफ उपस्थित रहे।
मुस्कान से सुनी कविता, किया उत्साहवर्धन
निरीक्षण के दौरान राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय महुआ की दसवीं कक्षा छात्रा मुस्कान गोयल ने जिला कलक्टर को अपनी पसंदीदा कविता "फायर एंड आई" सुनाई। छात्रा ने बताया कि कविता में मानव की असीमित इच्छाओं और घमंड की व्याख्या की गई है। इस पर जिला कलक्टर ने मुस्कान की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ अपनी प्रतिभाओं और रुचियों को भी निरंतर विकसित करना चाहिए।
उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी एवं विद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में नामांकन बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं, जिससे अधिक से अधिक बच्चे विद्यालय से जुड़ सकें।
बच्चों की सुरक्षा व जागरूकता पर दिया जोर
जिला कलक्टर ने कहा कि विद्यालयों में बच्चों, विशेषकर बालिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए “गुड टच और बैड टच” के बारे में बच्चों को जागरूक किया जाए, ताकि वे अपने शरीर की सुरक्षा, निजी सीमाओं और संभावित खतरों के प्रति सजग रह सकें।
उन्होंने कहा कि बच्चों में आत्मविश्वास और सशक्तिकरण का भाव विकसित करना आवश्यक है, जिससे वे किसी भी गलत व्यवहार के खिलाफ आवाज उठा सकें। समय रहते सही और गलत स्पर्श की पहचान कर बच्चों को जागरूक बनाना ही ऐसी घटनाओं की रोकथाम का प्रभावी माध्यम है।


