कालवाडी में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित
अलवर (दिनेश लेखी) राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कालवाड़ी में शुक्रवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अलवर के तत्वावधान में मानव- वन्यजीव संघर्ष विषय पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अलवर के अध्यक्ष अनंत भंडारी एवं सचिव मोहनलाल सोनी के मार्गदर्शन में किया गया।
शिविर में प्रधानाचार्य रामावतार शर्मा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे, जबकि पीएलवी दीपक कुमार मीना द्वारा कार्यक्रम का संचालन एवं जानकारी प्रदान की गई। शिविर की शुरुआत नालसा थीम सॉन्ग “एक मुठ्ठी आसमां” के साथ की गई।
पीएलवी दीपक कुमार मीना ने अपने संबोधन में बताया कि भारत में मानव और वन्यजीव संघर्ष एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। जंगली जानवरों के आबादी क्षेत्रों में प्रवेश करने तथा फसलों और जानमाल को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिनसे निपटने के लिए सरकार द्वारा सख्त कानूनी प्रावधान बनाए गए हैं।
उन्होंने बताया कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 देश का प्रमुख कानून है, जिसके अंतर्गत जंगली जानवरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है। अधिनियम की विभिन्न अनुसूचियों में जानवरों को उनकी संवेदनशीलता के आधार पर वर्गीकृत किया गया है, जिसमें बाघ और हाथी जैसे जीवों को विशेष संरक्षण प्राप्त है। धारा 11 के अंतर्गत यदि कोई जंगली जानवर मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बन जाए, तो मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक उसे मारने या बेहोश करने का आदेश दे सकता है, जबकि सामान्य नागरिक को ऐसा करने का अधिकार नहीं होता, सिवाय आत्मरक्षा की स्थिति के। वहीं धारा 39 के अनुसार सभी वन्यजीव सरकारी संपत्ति माने जाते हैं और उनके अवशेषों पर किसी व्यक्ति का अधिकार नहीं होता।
शिविर में आत्मरक्षा के अधिकार पर भी प्रकाश डाला गया। बताया गया कि यदि कोई जंगली जानवर अचानक हमला करता है, तो अपनी जान बचाने के लिए की गई कार्रवाई अपराध नहीं मानी जाएगी, बशर्ते यह साबित हो कि व्यक्ति के पास बचाव का अन्य कोई विकल्प नहीं था।
मुआवजा प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया गया कि जनहानि की स्थिति में पीड़ित परिवार को सामान्यतः 5 से 10 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जबकि स्थायी विकलांगता पर लगभग 2 लाख रुपये, फसल नुकसान पर प्रति एकड़ के हिसाब से तथा पशुधन हानि पर बाजार मूल्य के अनुसार मुआवजा दिया जाता है।
कार्यक्रम में महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए गए, जिनमें भीड़ द्वारा हिंसा को दंडनीय अपराध बताया गया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि जानवरों को उकसाने, उनके साथ छेड़छाड़ करने या संरक्षित वन क्षेत्रों में अवैध प्रवेश करने की स्थिति में मुआवजा नहीं मिलेगा और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
संघर्ष की स्थिति में तत्काल वन विभाग या पुलिस को सूचना देने, पंचनामा करवाने एवं साक्ष्य सुरक्षित रखने की सलाह दी गई। साथ ही आमजन से अपील की गई कि वे वन विभाग द्वारा निर्धारित बफर जोन का सम्मान करें और जंगली जानवरों से दूरी बनाए रखें।
शिविर में कुल 50 लाभार्थियों ने भाग लेकर जानकारी प्राप्त की। इस मौके पर रामप्रसाद सैनी उपप्राचार्य, विक्रम सिंह, मिथलेश कुमारी, अविनेश कुमार शर्मा, लालाराम सैनी सहित समस्त स्टाफ और ग्रामीण वासी मौजूद रहे।


