गोविन्दगढ़: कम प्रचार-प्रसार से सहभागिता रही कम, लेकिन 'ग्रामीण सेवा शिविर' बना मददगार: बरसों पुराने विवाद सुलझे, मिले पट्टे
गोविंदगढ़ (अमित खेडापति)
राजस्थान सरकार की ओर से आमजन को राहत देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे सेवा शिविरों की कड़ी में गुरुवार (18 जून) को गोविंदगढ़ नगरपालिका परिसर के वार्ड नं. 4 में शहरी सेवा शिविर और ग्राम पंचायत बारोली में ग्रामीण सेवा शिविर का आयोजन किया गया। हालांकि, इन शिविरों के व्यापक प्रचार-प्रसार के अभाव में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आम जनता की सहभागिता उम्मीद से कम देखने को मिली, लेकिन इसके बावजूद शिविर में पहुंचे ग्रामीणों के बरसों पुराने अटके काम मौके पर ही पूरे हो गए।
दशकों पुराना जमीनी विवाद आपसी सहमति से सुलझा
शिविर में बरसों से चली आ रही पारिवारिक और जमीनी समस्याएं चुटकियों में हल होती दिखीं। ग्राम अलघाना निवासी बसीर खान और साहब खान काफी समय से अपनी साझेदारी की कृषि भूमि का बंटवारा करवाने के लिए परेशान थे। वर्षों पुरानी इस पेचीदा समस्या को ग्रामीण सेवा शिविर में दोनों भाइयों की आपसी सहमति और अधिकारियों की सूझबूझ से न्यायपूर्ण बंटवारा करके हमेशा के लिए सुलझा दिया गया।
सहरून के चेहरे पर आई मुस्कान, मिला पट्टा
वहीं अलघाना निवासी सहरून पुत्र जुम्मा ने बताया कि वह लंबे समय से अपने मकान का पट्टा बनवाने के लिए प्रयासरत थे। उन्होंने शिविर से पहले ही आवेदन किया था। सहरून ने कहा, "जब मुझे पता चला कि 18 जून को बारोली में शिविर लग रहा है, तो मैं वहां पहुंचा। अधिकारियों ने पूरी संवेदनशीलता के साथ मेरे दस्तावेजों का सत्यापन किया और ग्राम पंचायत ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुझे मेरे मकान का पट्टा सौंप दिया।"
राजस्व और विकास कार्यों की रही धूम
विकास अधिकारी रमेश गुर्जर ने शिविर की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि बारोली शिविर में लाभार्थियों को 3 मकानों के पट्टे और 5 व्यक्तिगत शौचालयों की स्वीकृतियां जारी की गई हैं। इसके साथ ही गांव में स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए 'ठोस कचरा संग्रहण केंद्र' के लिए जगह का चिन्हीकरण भी किया गया।
एक नजर शिविर के कामकाज पर:
राजस्व विभाग ने मुस्तैदी दिखाते हुए मौके पर ही कई बड़े मामलों का निपटारा किया:
- नामांतरण (म्यूटेशन): 05 मामले
- भूमि विभाजन: 03 मामले
- शुद्धिकरण: 01 मामला
- प्रमाण पत्र: 25 जाति और मूल निवास प्रमाण पत्र जारी
- किसान सेवाएं: 4 फार्मर आईडी बनाई गईं और 40 किसानों को 'गिरदावरी ऐप' डाउनलोड करवाकर उसकी कार्यप्रणाली समझाई गई।
शिविर के दौरान प्रभारी तहसीलदार राजेंद्र यादव, विकास अधिकारी रमेश गुर्जर, ACBEO अकबर खान सहित राजस्व, जलदाय और अन्य प्रमुख विभागों के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे। हालांकि ग्रामीणों का कहना था कि यदि सरकार इन शिविरों का प्रचार-प्रसार पहले से करवाती, तो इस राहत का दायरा और बड़ा हो सकता था।


