सावन में शिव भक्तों की होगी हर मनोकामना पूर्ण: 3 अगस्त से पहला सोमवार, बन रहे अद्भुत ग्रहीय संयोग
सावन में चार सोमवार करेंगे शिव भक्तों की मनोकामना पूर्ण, 'शिवामूठ' प्रयोग और पूजा विधि से प्रसन्न होंगे भोलेनाथ
बावड़ी/जोधपुर ( मिश्रीलाल लखारा)। हिंदू धर्म में भगवान शिव की भक्ति के लिए सबसे पवित्र माना जाने वाला सावन का महीना आरंभ हो चुका है। इस बार सावन मास में कई अद्भुत और शुभ ग्रहीय संयोग बन रहे हैं। 30 जुलाई से शुरू हुआ यह पावन महीना 28 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान शिव भक्तों को भगवान आशुतोष की विशेष आराधना और व्रत के लिए कुल चार सोमवार प्राप्त हो रहे हैं, जिनमें से पहला सोमवार 3 अगस्त को पड़ेगा।
सोमवार का धार्मिक महत्व और ग्रहीय संयोग ज्योतिषीय एवं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवार का सीधा संबंध चंद्रमा से है, जो स्वयं भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान हैं। गुरु पूर्णिमा के बाद 3 अगस्त को पड़ रहे पहले सोमवार का ग्रहीय संयोग भक्तों के सभी मनोविकारों और दुखों का संहार कर घर-परिवार में सुख-समृद्धि की वृद्धि करेगा।
सावन के चारों सोमवार की तिथियां:
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पहला सोमवार: 3 अगस्त
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दूसरा सोमवार: 10 अगस्त
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तीसरा सोमवार: 17 अगस्त (नाग पंचमी का शुभ संयोग)
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चौथा सोमवार: 24 अगस्त
मनोकामना पूर्ति के लिए 'शिवामूठ' का विशेष उपाय प्राचीन ग्रंथों में वर्णित 'शिवामूठ' प्रयोग के तहत चारों सोमवार को बिना किसी बाधा के सूर्योदय से दोपहर 12 बजे के बीच शिवलिंग पर विशेष सामग्री अर्पण करने का विधान है:
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पहला सोमवार: शिवलिंग पर कच्चा दूध, अक्षत (साबुत चावल) और सफेद फूल अर्पित करें।
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दूसरा सोमवार: जल में काले तिल मिलाकर चढ़ाने से शारीरिक व मानसिक कष्ट दूर होते हैं।
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तीसरा सोमवार: हरी मूंग अर्पित करने से बुद्धि, ज्ञान और व्यापार में लाभ की मान्यता है।
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चौथा सोमवार: जौ या चने की दाल अर्पित करने से घर में धन-धान्य की अपार वृद्धि होती है।
सरल पूजा विधि सोमवार के दिन प्रातःकाल स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर शिव मंदिर में या घर पर ही शिवलिंग का गंगाजल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें। तत्पश्चात बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र व सफेद पुष्प अर्पित करते हुए 'ॐ नमः शिवाय' या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। श्रद्धा और निष्ठा से की गई यह पूजा भोलेनाथ की असीम कृपा प्राप्त कराएगी।

