178 बच्चों के अंग्रेजी माध्यम स्कूल के 2 कमरे जर्जर, पड़ोस के घर में चलने को मजबूर कक्षाएं
रामगढ़ (अलवर) सरकारें शिक्षा के स्तर को सुधारने और अंग्रेजी माध्यम के जरिए ग्रामीण बच्चों को बेहतर भविष्य देने के दावे तो बड़े-बड़े करती हैं, लेकिन धरातल पर सच्चाई इसके बिल्कुल उलट नजर आती है। राजस्थान के रामगढ़ क्षेत्र के मांडला कलां गांव से एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां 'महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूल' (MGGS) में पढ़ने वाले 178 बच्चे अपनी जान जोखिम में डालने के बजाय पड़ोसी के घर में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
5वीं से सीधे 12वीं में हुआ क्रमोन्नत, पर भवन का पता नहीं
गौरतलब है कि वर्ष 2023 में तत्कालीन राज्य सरकार ने इस प्राथमिक विद्यालय को सीधे कक्षा 12वीं तक क्रमोन्नत (upgrade) कर दिया था। क्रमोन्नत होने के 3 साल बाद भी स्कूल को नया भवन नसीब नहीं हुआ और यह पूरा विद्यालय महज 3 कमरों में ही संचालित होता रहा।
हाल ही में जून महीने में जब शिक्षा विभाग की टीम ने निरीक्षण किया, तो 3 में से 2 कमरों को पूर्णतः जर्जर (dilapidated) घोषित कर दिया गया। अब स्कूल में केवल एक ही कमरा बचा है, जिसमें 8 शिक्षकों और 178 विद्यार्थियों की व्यवस्था करना नामुमकिन हो गया।
जब सरकारी मदद नहीं मिली, तो ग्रामीणों और स्टाफ ने बढ़ाये हाथ
सरकारी स्तर पर बजट और मदद न मिलने पर स्कूल स्टाफ ने खुद आपस में पैसे जुटाकर एक टीन शेड का निर्माण कराया। लेकिन बारिश के मौसम में टीन शेड के नीचे 178 बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई दोनों पर संकट खड़ा हो गया।
ऐसे संकट के समय गांव के ही नसरू खां मसीहा बनकर सामने आए। उन्होंने संवेदनशीलता दिखाते हुए अपने निजी घर में बच्चों को पढ़ाने की लिखित अनुमति दी। फिलहाल स्कूल की कक्षाएं नसरू खां के घर में मौजूद 4 कमरों और चौक में संचालित की जा रही हैं।
रामगढ़ ब्लॉक: 38% स्कूल कमरे पूरी तरह या आंशिक रूप से जर्जर
मांडला कलां गांव की यह कहानी अकेली नहीं है। रामगढ़ ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (विश्राम गोस्वामी) के आंकड़ों के अनुसार:
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ब्लॉक मे कुल 230 स्कूल है जिनमे कुल 2137 कक्षा कक्षो मे से ब्लॉक के 38% कमरे (815 कमरे) क्षतिग्रस्त हैं। वहीं 406 कमरे पूरी तरह जर्जर हैं और 409 कमरे मरम्मत योग्य (रिपेयरिंग योग्य) हैं।
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12 स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर: गढ़ी धनेता, जुगरावर, कोटा कला, खरखड़ी और चिपराडा सहित 12 स्कूलों की हालत बेहद खस्ता है। हालांकि, इनमें से केवल 4 स्कूलों के लिए ही अब तक बजट आवंटित हो सका है।
विश्राम गोस्वामी, सीबीईओ, रामगढ़ का कहना है कि "मांडला कलां स्कूल में 3 में से 2 कमरे जर्जर और 1 मरम्मत योग्य है। फिलहाल नए भवन के लिए कोई बजट नहीं आया है। बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पास के ही एक निजी घर के मालिक से लिखित अनुमति लेकर वहां कक्षाएं चलाने की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।"

