बालव्यास की अमृतवाणी में जीवंत हुईं कृष्ण की बाल लीलाएं, गिरिराज पूजन व छप्पन भोग की झांकी ने बांधा भक्तिरस
जहाजपुर (मोहम्मद आज़ाद नेब)। खजूरी की शिवाजी कॉलोनी में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। मात्र 15 वर्षीय बालव्यास राधे कृष्ण महाराज (कोटड़ी) ने अपनी मधुर, ओजस्वी और प्रभावशाली वाणी से भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का ऐसा भावपूर्ण वर्णन किया कि श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर भक्तिरस में डूब गए।
कथाव्यास ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप, माखन चोरी, गोचारण, कालिय नाग दमन और गोप-गोपियों के साथ दिव्य लीलाओं का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला मानव जीवन को प्रेम, करुणा, धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि अहंकार का त्याग कर प्रभु की शरण में आने वाला व्यक्ति ही वास्तविक सुख और शांति का अनुभव करता है।
कथा के दौरान गिरिराज पूजन का प्रसंग अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के संदेश को आत्मसात करते हुए प्रकृति संरक्षण, गौसेवा और धर्म के प्रति समर्पण का संकल्प लिया। इसके बाद सजी छप्पन भोग की भव्य झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। रंग-बिरंगे पुष्पों की मनोहारी सजावट, आकर्षक श्रृंगार और दिव्य प्रस्तुति ने पूरे कथा पंडाल को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया। जय श्रीकृष्ण के जयघोषों के बीच श्रद्धालुओं ने दर्शन कर धर्मलाभ प्राप्त किया।
अंत में भजन-कीर्तन और महाआरती के साथ श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण से सुख, समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की। आयोजक पंडित रामगोपाल भट्ट ने बताया कि सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन 30 जून तक प्रतिदिन श्रद्धापूर्वक जारी रहेगा।


