नौगांवा में जगन्नाथ रूप में विराजे सांवरिया सेठ, दर्शन को उमड़े श्रद्धालु
माधव गौशाला में अलौकिक श्रृंगार, हवन-कीर्तन के साथ गूंजे जयकारे, 2016 से जारी है नित नए तीर्थों के दर्शन की परंपरा
गुरला:- (बद्रीलाल माली )नेशनल हाईवे 758, स्थित* ज्येष्ठ माह की शुक्ल पूर्णिमा पर सोमवार को ,नोगवा , स्थित गाडरमाला रोड माधव गौशाला परिसर के श्री सांवरिया सेठ मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। आज ठाकुर जी भक्तों को भगवान जगन्नाथ महाप्रभु के दिव्य रूप में दर्शन दिये है। सुबह 4 बजे मंगला आरती के साथ पट खुले तो भव्य श्रृंगार देख भक्त निहाल हो गए।
पुरी की तर्ज पर हुआ श्रृंगार
मंदिर ट्रस्ट के अनुसार जगन्नाथ पुरी मंदिर की परंपरा के अनुसार ही आज श्रृंगार किया गया। काले सलोने स्वरूप को विशाल नयन, लाल-पीले वस्त्र और फूलों की भारी मालाओं से सजाया गया। साथ में बलभद्र और सुभद्रा जी का भी श्रृंगार हुआ। दोपहर 12 बजे राजभोग में 56 भोग अर्पित किए गए। पुजारी दिपक प्रकाश ने बताया - "पूर्णिमा पर जगन्नाथ जी का रूप विशेष फलदायी है। जो भक्त इनके दर्शन कर ले, उसे चारों धाम का पुण्य मिल जाता है।"
8 साल से अनवरत जारी है परंपरा: कोई तीर्थ अछूता नहीं
22 अक्टूबर 2016 को माधव गौशाला में मंदिर की स्थापना स्वामी माधव दास जी महाराज ने की थी। स्थापना के दिन ही ट्रस्ट ने संकल्प लिया कि यहां आने वाले भक्तों को भारत के सभी प्रमुख तीर्थों के दर्शन एक ही जगह कराएंगे। ट्रस्टी गोविंद सोडानी ने बताया कि - "अब तक द्वारिकाधीश, श्रीनाथ जी नाथद्वारा, मथुरा के बांके बिहारी, बद्रीनाथ, केदारनाथ, तिरुपति बालाजी, मेहंदीपुर बालाजी, खाटू श्याम, रामलला अयोध्या और वामन अवतार सहित 25 से ज्यादा स्वरूपों के दर्शन करा चुके हैं। हर पूर्णिमा-अमावस्या और बड़े त्योहार पर नया रूप होता है।"
गौसेवा के साथ भक्ति का संगम बना धाम
यह मंदिर माधव गौशाला परिसर में ही बना है जहां 450 से ज्यादा गाय हैं। दर्शन करने आने वाले भक्त गौमाता को चारा-गुड़ भी खिलाते हैं। सोमवार को दर्शन के लिए भीलवाड़ा शहर के साथ कारोई, गुरला, हमीरगढ़, आसींद और शाहपुरा तक से लोग पहुंचे। गुरला निवासी पुजा शर्मा ने बताया कि - "पुरी नहीं जा पाते तो क्या हुआ, आज यहीं जगन्नाथ जी के दर्शन हो गए। मन को बहुत सुकून मिला।"


