नशे को ना, सपनों को हां कहें': राजगढ़ के स्कूलों में न्यायिक अधिकारियों ने जगाई जागरूकता
राजगढ़ (अलवर/ अनिल गुप्ता) राजगढ़ तालुका कानूनी सेवा समिति के तत्वावधान में मंगलवार को क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों में कानूनी और सामाजिक जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया। अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश और तालुका विधिक सेवा समिति के माननीय अध्यक्ष डॉ. लेखपाल शर्मा के निर्देशानुसार आयोजित इन शिविरों में बच्चों को नशे के दुष्प्रभावों, पोक्सो अधिनियम, साइबर सुरक्षा और उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया।
इन स्कूलों में आयोजित हुए शिविर तालुका सचिव भाग्यश्री मीणा ने बताया कि जागरूकता अभियान के तहत राजगढ़ स्थित लक्ष्मी बाल विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय सहित अन्य विद्यालयों में विशेष शिविर लगाए गए।
नशा कोई स्टाइल नहीं, जीवन की बर्बादी है
शिविरों में उपस्थित छात्र-छात्राओं को "नशे को ना हो, अपने सपनों को हां कहो, नशा कोई स्टाइल नहीं; अपने मन, शरीर और भविष्य की रक्षा करें" थीम के बारे में विस्तार से समझाया गया। न्यायिक अधिकारियों ने बच्चों को बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू, चरस, गांजा और कोकीन जैसे नशीले पदार्थों से दूर रहने की सलाह दी और इससे होने वाली गंभीर बीमारियों के प्रति आगाह किया।
साइबर ठगी से बचने के टिप्स और "कोर्ट वाली दीदी" बॉक्स
आज के डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए बच्चों को साइबर बुलिंग, ओटीपी स्कैम, डिजिटल अरेस्ट और इंटरनेट के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।
विशेष पहल: बच्चों को बताया गया कि साइबर सुरक्षा और किसी भी प्रकार की प्रताड़ना की शिकायत के लिए विद्यालयों में "कोर्ट वाली दीदी" के नाम से विशेष शिकायत बॉक्स रखे गए हैं। अगर बच्चे डर या झिझक के कारण अपनी परेशानी नहीं बता पाते हैं, तो वे अपनी शिकायत या संदिग्ध मैसेज का स्क्रीनशॉट लिखकर इस बॉक्स में डाल सकते हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण इन शिकायतों की जांच कर तुरंत सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
बाल श्रम और बाल विवाह के खिलाफ दी कानूनी जानकारी
शिविर में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (संख्या 01) दिलीप कुमार मीना, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (संख्या 02) श्रीमती प्रशंसा अग्रवाल, सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट आदित्य वशिष्ठ और अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती यशस्वी शर्मा ने बच्चों को शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009, बाल विवाह निषेध अधिनियम और बाल श्रम कानूनों की जानकारी दी।
न्यायिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से होटलों, दुकानों या किसी भी अन्य जगह पर मजदूरी कराना कानूनी अपराध है। ऐसा कराने पर होटल मालिकों और संबंधित पक्षों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।


