नगर परिषद चुनाव के रंग में रंगा खैरथल, गली-मोहल्लों से चौपाल तक चुनावी चर्चा तेज; जिला बचाओ आंदोलन से सभापति की कुर्सी तक सियासी गणित
खैरथल (हीरालाल भूरानी) खैरथल शहर इन दिनों नगर परिषद चुनाव के रंग में पूरी तरह रंगा नजर आ रहा है। गली-मोहल्लो से लेकर चौपाल, बाजार और चाय की थड़ियों तक चुनावी समीकरणों, प्रत्याशियों की सक्रियता और नए सभापति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई है। 9 सितंबर को होने वाले नगर परिषद चुनाव को लेकर शहरवासियों में खासा उत्साह नजर आ रहा है। सभापति के चुनाव में अहम भूमिका निभाने वाले पार्षद पद के मुकाबलों ने भी इस बार चुनाव को और रोचक बना दिया है।
खैरथल नगर परिषद चुनाव इस बार कई मायनों में पिछले चुनावों से अलग दिखाई दे रहा है। स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में पार्टी और जातिगत समीकरणों के साथ शहर के भविष्य से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से सामने आ रहे हैं।
खैरथल को जिला घोषित किए जाने के बाद शहर के नाम में बदलाव और जिला मुख्यालय को लेकर चली कवायद ने स्थानीय राजनीति को भी प्रभावित किया है। पिछले एक वर्ष से अधिक समय से खैरथल के नाम और जिला मुख्यालय को लेकर विभित्र स्तरों पर आंदोलन और प्रयास होते रहे हैं। अब नगर परिषद चुनाव के दौरान ये मुद्दे भी मतदाताओं की चर्चाओं का हिस्सा बन गए है। राजनीतिक जानकारों की नजर इस बात पर है कि शहर से जुड़े इन मुद्दों का चुनाबी परिणाम पर कितना असर पड़ता है और मतदाता स्थानीय विकास को प्राथमिकता देते हैं या बड़े राजनीतिक मुद्दों को।
45 वार्डों में चुनाव, कई मुकाबलों पर निगाह
नगर परिषद में 45 वार्ड गठित किए गए हैं। परिषद क्षेत्र के विस्तार के साथ आसपास के कुछ गांव भी नगर परिषद क्षेत्र में शामिल हुए हैं। इसके चलते इन क्षेत्रों में भी पहली बार नगर परिषद के प्रतिनिधित्व को लेकर चुनावी गतिविधियां तेज हैं। संभावित प्रत्याशी अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं और मतदाताओं से संपर्क का दौर शुरू हो चुका है। शहर के कई वाडों में मुकाबला रोचक होने के आसार हैं। वार्ड नंबर 18 में व्यापार समिति अध्यक्ष सर्वेश गुप्ता, वार्ड नंबर 2 में उपसभापति वरुण डाटा, वार्ड नंबर 12 में गिरीश डाटा और वार्ड नंबर 32 में राम सिंह शर्मा सहित कई प्रमुख चेहरों के मैदान में होने से इन वार्डो पर विशेष नजर रहेगी। वहीं पूर्व सभापति हरीश रोघा, पूर्व प्रधान ओमप्रकाश रोघाऔर एडवोकेट भानु प्रकाश जैसे चर्चित चेहरों से जुड़े राजनीतिक समीकरण भी शहर की चुनावी चर्चाओं के केंद्र में हैं।
जिला बचाओ आंदोलन भी बनेगा चुनावी चर्चा का हिस्सा
खैरथल की नई अनाज मंडी में जिला बचाओ संघर्ष समिति की ओर से चलाए गए आंदोलन ने भी इस चुनाव में अपनी अलग जगह बनाई है।
लंबे समय से चले आंदोलन के कारण शहर के विभिन्न वर्गों में खैरथल के नाम और जिला मुख्यालय को लेकर चर्चा बनी हुई है। ऐसे में आंदोलन से जुड़े पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं पर भी चुनाव के दौरान लोगों की निगाहें रहेंगी। संघर्ष समिति से जुड़े कुछ पदाधिकारी और कार्यकर्ता अलग-अलग वाड़ों से पार्षद पद के लिए चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। अब देखना यह होगा कि आंदोलन से जुड़े मुद्दे और प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़ चुनावी परिणामों को किस दिशा में प्रभावित करती है।
विकास के मुद्दे भी रहेंगे अहम
चुनावी चर्चाओं के बीच स्थानीय स्तर पर विकास के मुद्दे भी मतदाताओं की प्राथमिकता में है। शहर में सड़क, सफाई, जल निकासी, यातायात, अतिक्रमण और बढ़ते शहरी क्षेत्र के अनुरूप सुविधाओं की जरूरत जैसे मुद्दों पर भी वारों में चर्चा हो रही है। परिषद का क्षेत्र बढ़ने के बाद नई जिम्मेदारियां भी बढ़ी हैं। ऐसे में मतदाता इस बार केवल राजनीतिक पहचान के आधार पर नहीं, बल्कि अपने वार्ड के विकास और शहर के भविष्य को ध्यान में रखकर भी उम्मीदवारों का आकलन कर सकते हैं।
किसके सिर सजेगा सभापति का ताज?
कुल मिलाकर खैरथल नगर परिषद चुनाव में इस कई स्तरों पर मुकाबला दिखाई दे रहा है। एक बारों में प्रत्याशियों की व्यक्तिगत लोकप्रियता, स्थान समीकरण और विकास के मुद्दे है, तो दूसरी ओर के नाम और जिला मुख्यालय से जुड़े विषय भी चुना चर्चा के केंद्र में हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि वार्डों से चुने जाने वाले पार्षदों में जनता किसे अभप्रतिनिधि चुनती है और चुनाव के बाद इन्हीं पार्षदों बीच से सभापति की कुर्सी किसके हिस्से आती फिलहाल खैरथल की चुनावी चौपालों में इसी सब पर सबसे ज्यादा चर्चा है। प्रत्याशी अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं और राजनीतिक दल वार्ड समीकरण साधने में लगे हैं। अंतिम फैसला मतदाता के हाथ में है। 9 सितंबर का मतदान न केवल वार्डों के पार्षद तय करेगा, बल्कि खैरथल नगर परिषद की नई राजनीतिक दिशा की नींव भी रखेगा।

