लम्पी स्किन की रोकथाम हेतु जिला एवं ब्लॉक स्तरीय नियंत्रण कक्ष स्थापित; संक्रमित पशुओं के उपचार एवं आइसोलेशन की व्यवस्था
भरतपुर, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) लम्पी स्किन रोग के संभावित प्रकोप की रोकथाम, नियंत्रण एवं बचाव के लिए पशुपालन विभाग द्वारा जिला एवं ब्लॉक स्तर पर नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय, भरतपुर में स्थापित किया गया है।
संयुक्त निदेशक पशुपालन डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि लम्पी स्किन डिजीज से संबंधित किसी भी सूचना के लिए जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष के दूरभाष 05644-224375 एवं मोबाइल 9414207820 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके साथ ही प्रत्येक ब्लॉक में प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय में कार्यरत नोडल अधिकारी को ब्लॉक स्तरीय नियंत्रण कक्ष का प्रभारी बनाया गया है।
ब्लॉकवार नोडल अधिकारी एवं संपर्क नंबर
संयुक्त निदेशक पशुपालन ने बताया कि ब्लॉक भरतपुर शहरनोडल अधिकारी/नियंत्रण कक्ष प्रभारी डॉ. राजीव सिंघल के मोबाइल नंबर 9414207820, ब्लॉक सेवर नोडल अधिकारी डॉ. प्रद्युम्नाल सिंह के 9001362578, ब्लॉक कुम्हेर डॉ. राजपाल सिंह के 9221647200 और ब्लॉक डीग डॉ. भावना यादव के 9411027566, कामां ब्लॉक डॉ. नीरज गुप्ता के 9950651031, ब्लॉक पहाड़ी डॉ. सलीम खान के 9784874285, ब्लॉक नगर डॉ. नत्थीराम मीना के 9461404506, ब्लॉक नदबई डॉ. राजेश चौधरी के 9414711405, ब्लॉक वैर डॉ. मुकेशचंद मीना के 9664138629, ब्लॉक भुसावर के नोडल अधिकारी डॉ. हरिओम शर्मा के दूरभाष नम्बर 9929155504, ब्लॉक बयाना डॉ. गिरीश गोयल के 9784992204, ब्लॉक रूपवास डॉ. हितेश वशिष्ठ के 8949033792 और ब्लॉक उच्चैन के नोडल अधिकारी डॉ. अभिषेक कैन के मोबाईल नम्बर 9079960430 रहेंगे।
लक्षण दिखाई देने पर तत्काल दें सूचना
उन्होंने बताया कि विभाग ने जिले के समस्त विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ-साथ किसानों एवं पशुपालकों से अपील की है कि पशुओं में लम्पी स्किन डिजीज के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल इसकी सूचना संबंधित नियंत्रण कक्ष को दें। प्राप्त सूचना को संबंधित ब्लॉक में तत्काल प्रेषित किया जाएगा तथा रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) रोगी पशु के उपचार के लिए मौके पर पहुंचेगी। पशुपालकों को सलाह दी गई है कि संदिग्ध अथवा रोगग्रस्त पशु को अन्य पशुओं से अलग रखते हुए आइसोलेट करें, ताकि संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित किया जा सके और संक्रमित पशु का समय पर उपचार सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने पशुपालकों से अपील की है कि वे पशुओं के स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी रखें और किसी भी प्रकार के संदिग्ध लक्षण नजर आने पर स्वयं उपचार करने के बजाय तत्काल पशु चिकित्सा विभाग को सूचित करें। विभाग द्वारा प्राप्त सूचना के आधार पर आवश्यक उपचार एवं नियंत्रण संबंधी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

