22 वर्ष की उम्र में नेट-जेआरएफ परीक्षा उत्तीर्ण कर मनस्वी ने भीलवाड़ा का नाम किया रोशन; कथक नृत्य में भी है विशिष्ट पहचान
भीलवाड़ा (राजकुमार गोयल) प्रतिभा, लगन और निरंतर साधना के बल पर भीलवाड़ा शहर की 22 वर्षीय युवा कलाकार सुश्री मनस्वी ने अपनी शैक्षणिक एवं कलात्मक उपलब्धियों से शहर का नाम गौरवान्वित किया है। मनस्वी ने मात्र 22 वर्ष की उम्र में नेट एवं जेआरएफ (Junior Research Fellowship) परीक्षा उत्तीर्ण कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उनकी इस सफलता से कला एवं शिक्षा जगत में हर्ष का वातावरण है।
मनस्वी ने अपनी प्रतिभा का परिचय केवल अकादमिक क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि कथक नृत्य के क्षेत्र में भी लगातार दिया है। वे दूरदर्शन की ग्रेड कलाकार हैं तथा लंबे समय से कथक नृत्य की बारीकियों का अध्ययन एवं अभ्यास कर रही हैं। उनकी नृत्य साधना में शास्त्रीय परंपरा, अनुशासन और निरंतर अभ्यास का विशेष योगदान रहा है।
वर्तमान में मनस्वी राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से परफॉर्मिंग आर्ट का अध्ययन कर रही हैं। इसके साथ ही वे जयपुर कथक केंद्र से जुड़कर कथक गुरु चेतन कुमार झवड़ा के निर्देशन में गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत कथक का गहन प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। अध्ययन और कला साधना के इस समन्वय ने मनस्वी के व्यक्तित्व को बहुआयामी बनाया है।
मनस्वी पच्चीसिया ने नेट-जेआरएफ परीक्षा में सफलता इसलिए भी विशेष है क्योंकि उन्होंने कम उम्र में ही उच्च शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। कला के साथ-साथ अकादमिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन यह दर्शाता है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और उसके लिए निरंतर मेहनत की जाए तो सफलता की कोई सीमा नहीं होती।
अपनी इस उपलब्धि पर मनस्वी ने कहा कि उनकी सफलता के पीछे उनकी मां, रमा पच्चीसिया, का विशेष योगदान रहा है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां के साथ-साथ अपने सभी कला गुरुओं, शिक्षकों एवं मार्गदर्शकों को दिया। मनस्वी का कहना है कि गुरुजनों के मार्गदर्शन, परिवार के सहयोग और निरंतर अभ्यास ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
मनस्वी की इस उपलब्धि पर कला प्रेमियों, शिक्षाविदों, कलाकारों एवं शहरवासियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है। सभी ने विश्वास व्यक्त किया कि मनस्वी भविष्य में शिक्षा, शोध और भारतीय शास्त्रीय नृत्य के क्षेत्र में और भी महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कर भीलवाड़ा तथा राजस्थान का गौरव बढ़ाएंगी।
मनस्वी की कहानी उन युवा प्रतिभाओं के लिए प्रेरणादायी है, जो कला के साथ उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। कम उम्र में ही कथक जैसी शास्त्रीय कला में अपनी पहचान स्थापित करने के साथ नेट-जेआरएफ जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता हासिल करना उनकी प्रतिभा, समर्पण और मेहनत का प्रमाण है।
मनस्वी की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार और गुरुजनों के लिए गौरव का विषय है, बल्कि पूरे भीलवाड़ा शहर के लिए गर्व की बात है।

