आस्था और लोक संस्कृति का संगम: सोमवार को हर्षोल्लास से मनाई जाएगी सातुड़ी तीज, सुहागिनें रखेंगी व्रत
बावड़ी/जोधपुर (मिश्रीलाल लखारा)। कस्बे सहित समूचे उपखंड क्षेत्र में सुहागिनों और कुंवारी कन्याओं का पावन एवं पारंपरिक पर्व सातुड़ी तीज (कजली तीज) सोमवार को अत्यंत हर्षोल्लास और धार्मिक विधि-विधान के साथ मनाया जाएगा। राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति, मानसून के उल्लास और अखंड सौभाग्य के इस पर्व को लेकर क्षेत्र की महिलाओं व युवतियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
सत्तू के स्वाद और नीमड़ी माता की पूजा की रहेगी धूम
सातुड़ी तीज (जिसे बड़ी तीज भी कहा जाता है) के अवसर पर घरों में विशेष रूप से जौ, चने, चावल और गेहूं के सत्तू से विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाएंगे। महिलाएं एक-दूसरे के घर सत्तू से बने पकवानों का आदान-प्रदान कर सौहार्द का संदेश देंगी। शाम को नीमड़ी माता, भगवान श्री गणेश और सातुड़ी तीज माता का विधि-विधान से पूजन कर सामूहिक रूप से व्रत कथा सुनी जाएगी। इसके बाद रात को चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य अर्पित करने के साथ ही व्रत का पारण किया जाएगा।
पति की दीर्घायु और मनवांछित वर की कामना
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से दांपत्य जीवन में प्रेम, सौहार्द और सुख-समृद्धि का वास होता है। सुहागिन महिलाएं जहां पति की लंबी उम्र के लिए यह व्रत रखेंगी, वहीं अविवाहित युवतियां मनवांछित वर की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करेंगी। पर्व के अवसर पर महिलाओं द्वारा झूले झूलने और पारंपरिक तीज के लोकगीत गाने की भी समृद्ध परंपरा रही है, जिससे पूरे क्षेत्र का माहौल उत्सवमयी नजर आ रहा है।

