कोटपूतली-बहरोड़ में लोकतंत्र का महाउत्सव: गांवों की सरकार चुनने उमड़े ग्रामीण, पंच-सरपंच चुनाव में दिखा गजब का उत्साह
कोटपूतली-बहरोड़ / भारत कुमार शर्मा
कोटपूतली-बहरोड़ जिले के कोटपूतली, पावटा, बानसूर और नारायणपुर पंचायत समिति क्षेत्रों की ग्राम पंचायतों में आज पंच एवं सरपंच पदों के लिए हुआ मतदान लोकतांत्रिक उत्सव और जनभागीदारी की अनूठी मिसाल बन गया। गांवों की अपनी सरकार चुनने के लिए सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं का जो तांता लगा, वह दिनभर उत्साह के साथ जारी रहा। ग्रामीण अंचल में लोकतंत्र के इस महापर्व पर किसी उत्सव सा माहौल नजर आया। हर वर्ग के चेहरे पर अपने गांव के विकास की कमान योग्य हाथों में सौंपने का संकल्प साफ झलक रहा था।
युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक में दिखा गजब का जोश
मतदान केंद्रों पर सुबह की पहली किरण के साथ ही मतदाताओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। एक ओर जहां पहली बार मतदान करने वाले युवाओं में जबरदस्त क्रेज और नया जोश देखने को मिला, वहीं दूसरी ओर महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी दर्ज कराई। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं की टोलियां कतारों में अपनी बारी का इंतजार करती नजर आईं।
उम्र और शारीरिक चुनौतियां भी नहीं डिगा पाईं हौसला
लोकतंत्र के प्रति इस दीवानगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उम्र की सीमाएं और शारीरिक बाधाएं भी मतदाताओं के जोश को कम नहीं कर सकीं। कई बुजुर्ग मतदाताओं को उनके परिजन सहारे या व्हीलचेयर पर मतदान केंद्र तक लेकर पहुंचे। प्रशासन द्वारा दिव्यांग और बुजुर्ग मतदाताओं के लिए की गई विशेष व्यवस्थाओं और सुगम प्रबंधों ने इस प्रक्रिया को और भी आसान बना दिया।
गांव के विकास की दिशा तय करती है 'गांव की सरकार'
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंच और सरपंच का चुनाव ग्रामीण लोकतंत्र की सबसे बुनियादी और मजबूत कड़ी है। स्थानीय समस्याओं के समाधान, बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और गांव की तकदीर व तस्वीर बदलने में इन स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका सबसे अहम होती है। आज ग्रामीणों की यह सक्रिय भागीदारी और मतदान के प्रति उनका रुझान इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि वे अपने गांव के भविष्य को लेकर पूरी तरह जागरूक हैं।
अंततः, कोटपूतली-बहरोड़ अंचल में संपन्न हुआ यह चुनाव महज प्रतिनिधियों को चुनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की परिपक्वता और लोकतंत्र के प्रति अटूट विश्वास का एक जीवंत दस्तावेज बन गया है।

