गाँव की सरकार खुद बनाएगी विकास का खाका: केंद्रीय कैबिनेट ने 'प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना' को दी मंजूरी
नई दिल्ली (कमलेश जैन) : देश की ग्राम पंचायतें अब केवल सरकारी योजनाओं को लागू करने वाली एजेंसी बनकर नहीं रहेंगी, बल्कि वे खुद अपनी स्थानीय जरूरतों के हिसाब से गांव के विकास की योजनाएं तैयार करेंगी। 'विकसित भारत' की संकल्पना को धरातल पर उतारने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए ‘प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना’ को हरी झंडी दे दी है।
2026 से 2031 तक लागू होगी योजना, ₹7,395.55 करोड़ का बजट कैबिनेट निर्णय की जानकारी देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक (5 वर्षों के लिए) लागू रहेगी। योजना का कुल बजट 7,395.55 करोड़ रुपये तय किया गया है, जिसमें:
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केंद्र सरकार का अंशदान: ₹4,869.48 करोड़
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राज्य सरकारों का अंशदान: ₹2,526.07 करोड़
इस योजना से देशभर की 2.55 लाख से अधिक पंचायतों के करीब 32 लाख जनप्रतिनिधियों और पंचायत-कर्मियों को सीधा फायदा और प्रशिक्षण मिलेगा।
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल से जुड़ेगा गांव का पूरा ब्योरा मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि अब तक योजनाओं में ऊपर से तय होता था कि क्या काम करना है, लेकिन नई व्यवस्था में हर साल 2.55 लाख ग्राम पंचायत विकास योजनाएं (GPDP) स्थानीय प्राथमिकताओं के आधार पर तैयार होंगी।
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डिजिटल एकीकरण: 'ई-ग्राम स्वराज पोर्टल' पर गांव की जरूरतों, केंद्र व राज्य की योजनाओं और उपलब्ध बजट का पूरा ब्योरा एकीकृत (इंटीग्रेट) किया जाएगा।
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सटीक विकास: इससे पंचायतों को यह समझने में आसानी होगी कि कहां सड़क, पेयजल या अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी है और उसे किन संसाधनों से पूरा किया जा सकता है।
योजना की प्रमुख विशेषताएं एवं मुख्य बिंदु:
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पारंपरिक निकायों को भी लाभ: जिन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में सामान्य ग्राम पंचायतें नहीं हैं, वहां पारंपरिक स्थानीय निकायों को इसके दायरे में लाया जाएगा।
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क्षमता निर्माण व प्रशिक्षण: हर साल निर्वाचित प्रतिनिधियों और कर्मचारियों का डिजिटल और व्यावहारिक प्रशिक्षण होगा, ताकि वे योजना निर्माण और ग्रामीणों से बेहतर संवाद कर सकें।
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अपनी आमदनी बढ़ाने पर जोर: पंचायतों को केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर रहने के बजाय अपने खुद के राजस्व स्रोत (Own Source Revenue) बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
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संविदा पर तकनीकी स्टाफ: योजना के तहत कोई नया स्थायी पद नहीं बनाया जाएगा, लेकिन सुचारू संचालन के लिए राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) पर तकनीकी विशेषज्ञों की सेवाएं ली जा सकेंगी।
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व्यापक जागरूकता अभियान: ग्राम सभाओं और डिजिटल माध्यमों के जरिए प्रति वर्ष कम से कम 1 करोड़ लोगों तक जानकारी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

