महुवा में भारी बारिश के बीच जोश के साथ संपन्न हुए पंचायत चुनाव: दो गांवों के 1200 से अधिक मतदाताओं ने किया मतदान का बहिष्कार
महुवा / अवधेश अवस्थी
राजस्थान पंचायती राज चुनाव के दूसरे चरण के तहत महुवा विधानसभा क्षेत्र की चार पंचायत समितियों—महुवा, मनोहरपुर खेडला, मंडावर और बैजूपाड़ा की ग्राम पंचायतों में सरपंच एवं वार्ड पंच पदों के लिए शुक्रवार को मतदान शांतिपूर्ण संपन्न हो गया। मौसम खराब होने और सुबह हुई बारिश के बावजूद मतदाताओं का उत्साह कम नहीं हुआ, हालांकि प्रशासनिक सीमाओं और ग्राम पंचायत परिवर्तन की मांग को लेकर दो गांवों के मतदाताओं ने मतदान का पूरी तरह बहिष्कार कर एक बड़ा संदेश दिया है।
बारिश के बीच भीगते हुए पहुंचे मतदाता, दिव्यांग महिला ने पेश की मिसाल
शुक्रवार सुबह 7 बजे से शुरू हुई मतदान प्रक्रिया के दौरान महुवा, रसीदपुर और कमालपुर समेत विभिन्न केंद्रों पर अनूठा नजारा देखने को मिला। सुबह की हल्की बारिश के बीच छाते लेकर और भीगते हुए मतदाता कतारों में अपनी बारी का इंतजार करते दिखे। कमालपुर बूथ सेंटर पर एक वृद्ध दिव्यांग महिला द्वारा बारिश की परवाह किए बिना केंद्र पहुंचकर मतदान करने का दृश्य हर किसी के लिए प्रेरणास्रोत बन गया। मौसम की बाधाओं को दरकिनार कर ग्रामीणों ने साबित कर दिया कि लोकतंत्र के इस महापर्व में भागीदारी उनके लिए सर्वोपरि है। समाचार लिखे जाने तक मतदान के बाद मतगणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी।
दो गांवों में मांग को लेकर चुनाव का बहिष्कार, 1202 मतदाताओं ने बनाई दूरी
एक तरफ जहां अधिकांश क्षेत्रों में जश्न और उत्साह का माहौल रहा, वहीं महुवा पंचायत समिति के दो गांवों में ग्रामीणों का गुस्सा प्रशासनिक उदासीनता पर फूट पड़ा। ग्राम पंचायत बदलने की मांग को लेकर इन गांवों ने चुनाव का पूरी तरह बहिष्कार कर दिया:
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प्यारा का नगला (सायपुर ग्राम पंचायत): यहाँ के करीब 660 मतदाताओं ने अपनी मांग दोहराते हुए मतदान केंद्रों का रुख नहीं किया। ग्रामीणों की मांग है कि उनके गांव को सायपुर से हटाकर वापस 'खोचपुरी ग्राम पंचायत' में जोड़ा जाए।
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करनपुर (पीपलखेड़ा पंचायत): यहाँ भी लगभग 542 मतदाताओं ने मतदान से पूरी तरह दूरी बनाए रखी। इनकी मांग है कि करनपुर को पीपलखेड़ा के बजाय पुनः 'पाटोली ग्राम पंचायत' में शामिल किया जाए।
इन दोनों गांवों के कुल 1202 मतदाताओं द्वारा वोट न डालने का यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा, जिसने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बहरहाल, व्यापक सुरक्षा प्रबंधों और प्रशासनिक मुस्तैदी के बीच अधिकांश क्षेत्रों में चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गए।

