सज-धजकर महिलाओं ने की चौथ माता की पूजा: बावड़ी व ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक आस्था के साथ मनाया गया करवा चौथ
बावड़ी (जोधपुर ग्रामीण / मिश्रीलाल लखारा)। भारतीय नारी के समर्पण, सहजता, त्याग और पति परायणता का प्रतीक करवा चौथ का पावन पर्व गुरुवार को कस्बे सहित पूरे ग्रामीण क्षेत्र में पारंपरिक श्रद्धा, आस्था और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। अपने पति के प्रति असीम प्रेम और निष्ठा व्यक्त करते हुए महिलाओं ने दिनभर निर्जला व्रत रखा और रात्रि में पति के मंगलमय, सुखमय तथा दीर्घायु जीवन की याचना की।
सोलह श्रृंगार कर सज-धजकर तैयार हुईं सुहागिनें
पतिव्रत धर्म को समर्पित महिलाओं ने इस दिन सोलह श्रृंगार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कस्बे के ब्यूटी पार्लरों में दिनभर महिलाओं की भारी भीड़ देखने को मिली। वहीं, हाथ रचाने के लिए मेहंदी लगाने वाली कलाकारों की विशेष मांग रही। महिलाओं ने अपने हाथों पर आकर्षक और मनमोहक मेहंदी की डिजाइनें लगवाईं और एक-दूसरे से बेहतरीन डिजाइनों की चर्चा करती नजर आईं।
शाम को की पूजा-अर्चना, सुनी करवा चौथ की कथा
शाम के समय शुभ मुहूर्त में सज-धजकर जुटी महिलाओं ने करवा चौथ माता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। पंडितजी के मुखारविंद से ध्यानपूर्वक करवा चौथ की कथा सुनी और अपने पति की लंबी उम्र व उत्तम स्वास्थ्य के साथ-साथ पूरे परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की मन्नत मांगी।
चांद को अर्घ्य देकर पति के हाथों पिया जल
रात्रि में चंद्रदेव के उदित होने पर महिलाओं का इंतजार समाप्त हुआ। सुहागिनों ने छलनी से चंद्रमा के दर्शन किए, जल से अर्घ्य देकर चंद्रदेव का पूजन किया और इसके पश्चात छलनी से अपने पति का चेहरा देखा। पतियों ने अपनी पत्नियों को जल पिलाकर और मिठाई खिलाकर व्रत खुलवाया। इस प्रकार भक्ति, समर्पण और दांपत्य प्रेम का यह पावन पर्व उल्लास के साथ संपन्न हुआ।

