सरकार ने शादी के लिए 55 हजार रुपए देने की योजना की थी शुरू
सात साल बाद भी श्रमिकों की बेटियों को शुभ शक्ति योजना का नहीं मिल पाया लाभ
खैरथल (हीरालाल भूरानी ) सरकार बेटियों के उत्थान के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है। योजनाओं का लाभ सुचारू रूप से मिलने के दावे भी किए जाते है, लेकिन यह दावे शुभ शक्ति योजना की स्थिति देखकर खोखले साबित हो रहे हैं।
राज्य सरकार ने श्रम विभाग के माध्यम से शुभ शक्ति योजना के तहत श्रमिकों की बेटियों को शादी के लिए 55 हजार रुपए देने की योजना शुरू की थी, लेकिन पिछले 7 वर्ष से इस योजना के तहत आवेदन करने वाले श्रमिक की बेटी को प्रोत्साहन राशि नहीं मिल पा रही है। जिला स्तर पर कुछ आवेदन तो स्वीकृत किए गए और बाकी पेंडिंग में डाल रखे है। उनको स्वीकृत करने की मंशा भी विभाग की लगती नहीं है। ऐसे में यह योजना खैरथल- तिजारा जिले में महज दिखावा साबित हो रही है। इन आवेदनकर्ताओ को उम्मीद है कि अब प्रोत्साहन राशि मिल सकेगी। वहीं ऐसे में करोड़ों रुपए श्रमिकों को बेटियों का अटका हुआ है।
श्रमिकों को बाजार से ऋण लेकर बच्चियों के हाथ पीले करने पड़ रहे हैं। दूसरी ओर श्रम यूनियन खैरथल से जुड़े जितेंद्र जीतू का कहना है कि नए जिले में श्रम विभाग का ऑफिस खोलना ही सरकार भूल गई है। आज भी अपनी छोटी मोटी समस्या के लिए श्रमिकों को अलवर जाना पड़ता है और अपना पैसा और समय बर्बाद करना पड़ता है। रोज रोज श्रमिक अलवर के चक्कर लगा नहीं पाता और उसके आवेदन पेंडिग ही पड़े रहते है। विभाग भी खैरथल- तिजारा के श्रमिक को अलवर ही बुलाता है, लोग परेशान होते है। जिला समस्याओं के निराकरण के लिए प्रशासन को एक श्रम अधिकारी तो कम से कम खैरथल जिला हैडक्वाटर पर बिठाना चाहिए, जिससे श्रमिकों की छोटी छोटी समस्याओं का हल हो सके या फिर श्रमिक वर्ग के लिए खैरथल जिला हैडक्वाटर पर शिविर लगाना चाहिए।
बजट की कमी से अटकी योजना - शुभ शक्ति योजना के तहत श्रमिकों ने अपनी बेटियों के पीले हाथ करने के लिए आवेदन किया गया था, लेकिन 7 वर्ष बीत जाने के बाद भी इस योजना का श्रमिकों को लाभ नही मिल पाया है। इसके लिए श्रमिक आए दिन श्रम विभाग के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन हर बार उनको बजट की कमी बताकर टरका दिया जाता है। सात साल से योजना में एक रुपए का भी बजट नहीं आया है। सूत्रों ने बताया कि योजना में बजट उच्च स्तर से ही नहीं आ रहा है। जिला मुख्यालय से योजना संबंधी कोई काम लम्बित नहीं है। इसके बाद भी श्रमिकों की बेटियों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। पोर्टल पर पेंडिंग दिखाया जा रहा है।

