आशा सहयोगिनियों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों के समाधान की मांग की
भरतपुर (कोशलेन्द्र दत्तात्रेय)
स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा सहयोगिनियों ने जिला मुख्यालय पर अपने हक और समस्याओं को लेकर जमकर प्रदर्शन किया। रूपबास ब्लॉक से आई करीब तीन दर्जन आशा सहयोगिनियां कलेक्ट्रेट परिसर में इकट्ठा हुईं और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों के समाधान की मांग की। प्रदर्शन कर रहीं आशा सहयोगिनियों का कहना था कि जब उन्हें नियुक्त किया गया था, तब उनकी भूमिका मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने तक सीमित थी। लेकिन अब समय के साथ उन पर आभा आईडी बनाने, आयुष्मान भारत कार्ड तैयार करने और क्षय रोगियों की निश्चय आईडी जनरेट करने जैसे तकनीकी और गैर-स्वास्थ्य संबंधी कार्य भी थोप दिए गए हैं। ये कार्य पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से होते हैं, जिनके लिए न तो उन्हें कोई प्रशिक्षण दिया गया है और न ही कोई अतिरिक्त भुगतान किया जाता है। आशाओं ने बताया कि उन्हें हर माह केवल 4500 रुपये मानदेय मिलता है, जबकि उनसे किए जा रहे कार्यों की सूची लगातार लंबी होती जा रही है। इसके साथ ही इंटरनेट, मोबाइल डेटा और अन्य संसाधनों का खर्च भी उन्हें स्वयं वहन करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार उन पर लगातार नई जिम्मेदारियां डाल रही है, वहीं दूसरी ओर उनके अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगी।