धूमधाम मनाया गया भाई-बहन के अटूट स्नेह का पर्व रक्षाबंधन

Aug 9, 2025 - 17:40
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धूमधाम मनाया गया भाई-बहन के अटूट स्नेह का पर्व रक्षाबंधन

नारायणपुर (भारत कुमार शर्मा) :-  उपखंड क्षेत्र में भाई बहन के अटूट स्नेह का पर्व रक्षाबंधन सोमवार को हर्षोल्लास से मनाया गया। हर वर्ष की तरह सावन पूर्णिमा पर बहनों ने भाईयों की कलाई पर राखी के रूप में रक्षा सूत्र बांधकर दीर्घायु की कामना की। परम्परा का निर्वहन करते हुए भाइयों ने बहनों को उपहार भेंटकर जीवनभर रक्षा का संकल्प लिया। रक्षा बंधन को लेकर उपखंड क्षेत्र सहित स्थानीय पुलिस थाने में भारी उत्साह दिखा।बहन-भाई के प्यार का प्रतीक रक्षाबंधन पर हर घर में उत्साह देखने मिला। भाई कलाई पर प्रेम का सूत बांधने के लिए बहने आतुर दिखाई दी तो भाइयों खुशी-खुशी राखी बंधवाइ। बहनें सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर भाई को राखी बांधने पहुंचे। भाइयों ने भी बहनों के घर पहुंचने पर स्वागत किया। इससे पहले रक्षा बंधन को लेकर घरों में विशेष तैयारियां की गई थीं। राखी की त्योहार मनाने से पहले परम्परा के अनुसार लोगों स्नान कर पूजा के लिए मंदिर पहुंचे। इसके उपरांत बहनों ने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत बांधकर जन्म-जन्म तक सुख-दुःख में साथ निभाने का वचन भाईयों से लिया। वहीं भाईयों ने भी बहनों को उपहार देकर हमेशा साथ निभाने का वादा किया। इस दौरान भाइयों ने अपनी बहनों को उपहार भेंट किए। सबसे ज्यादा उत्साह बच्चों में देखने मिला। बच्चियां अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने आतुर दिखी तो बच्चे भी राखियां बंधवाने के लिए उत्साहित दिखे। 
बता दे कि ऐतिहासिक और पौराणिक कथाएं और इतिहास है कि रक्षा बंधन की जड़ें भारतीय पौराणिक कथाओं और इतिहास में गहरी हैं। इस पर्व से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं, जो इसके महत्व को और गहरा करती हैं। सबसे प्रसिद्ध पौराणिक कथा भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी की है। जब श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया, तब उनकी उंगली घायल हो गई थी। द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया। इस प्रेम और विश्वास के प्रतीक के बदले में श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा का वचन दिया। बाद में, जब कौरवों ने द्रौपदी का चीरहरण करने की कोशिश की, तब श्रीकृष्ण ने उनकी लज्जा की रक्षा की। यह कथा रक्षा बंधन के मूल में निहित प्रेम और रक्षा के भाव को दर्शाती है। यह पर्व केवल पारिवारिक रिश्तों तक सीमित न रहकर सामाजिक और राजनैतिक एकता का प्रतीक भी बन गया।इसके अलावा, महाभारत में भी रक्षाबंधन का उल्लेख मिलता है, जहां युधिष्ठिर को श्रावण पूर्णिमा के दिन राखी बांधने की सलाह दी गई थी ताकि वे युद्ध में विजयी हों।रक्षा बंधन का सांस्कृतिक महत्व भारतीय समाज में गहराई से समाया हुआ है। राखी का धागा केवल एक सूत्र नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक है। यह पर्व सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है और रिश्तों को मजबूत करने और एक-दूसरे के प्रति कर्तव्यों को याद दिलाने का अवसर प्रदान करता है।

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