अखंड सौभाग्य का प्रतीक कजरी तीज पर्व 12 अगस्त को
लक्ष्मणगढ़ (अलवर) कमलेश जैन
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज का पर्व मनाया जाएगा। योग शिक्षक पंडित लोकेश कुमार ने बताया कि 12 अगस्त दिन मंगवार को कजरी तीज पर्व मनाया जाएगा। ग्रामीण अंचलों में महिलाएं कजरी गीत गाकर, झूले झूलकर और श्रृंगार करके इस व्रत को हर्षोल्लास से मनाती है।
महिलाएं निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव-पार्वती की पूजा करती हैं। इस पर्व के पीछे पौराणिक इतिहास है, जो इसे एक अनूठी आध्यात्मिक पहचान देता है। कजरी तीज का ऐतिहासिक आधार हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों स्कंद पुराण और शिव महापुराण में मिलता है। कजरी तीज का महत्व मुख्यतः स्त्रियों के सौभाग्य, दांपत्य सुख और मनोकामना पूर्ति से जुड़ा है।यह तीज भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है, जब श्रावण-भाद्रपद के बीच सावन की घटाओं और कजरी गीतों का वातावरण होता है।
शिवजी ने पार्वतीजी को पत्नी रूप में स्वीकार किया
कथाओं के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था।इस तपस्या का फल उन्हें 108 जन्मों के बाद मिला, जब भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। यही कारण है कि इस दिन को दांपत्य सुख की प्रतीक तिथि माना जाता है।
कजरी तीज का महत्व
यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं द्वारा रखा जाता है, जो न केवल पति की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं, बल्कि अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की कामना से इस दिन उपवास करती हैं। इतिहास में इसे स्त्री तप, धैर्य और समर्पण की संपूर्ण अभिव्यक्ति माना गया है। सुहागिन महिलाएं विशेष रूप से हरी साड़ी, हरी चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी और मेहंदी आदि सोलह श्रृंगार करती हैं और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर सुखी वैवाहिक जीवन की प्रार्थना करती हैं। और कथा सुनती हैं। यह पर्व श्रावणी सौंदर्य और वर्षा ऋतु के आनंद का भी प्रतीक भी है।
कजरी तीज पर नीमड़ी पूजन
कजरी तीज पर नीम की पूजा, जिसे ‘नीमड़ी पूजन’ कहा जाता है, महत्वपूर्ण मानी जाती है।प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, नीम की छाया को शुद्धता, औषधीय गुण और स्त्री ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। महिलाएं नीम की डाली को देवी का स्वरूप मानकर उसकी पूजा करती हैं। कई स्थानों पर नीम की पत्तियों के ऊपर मिट्टी से बनी देवी की प्रतिमा स्थापित कर पूजन किया जाता है। महिलाएं इस पूजन में हल्दी, सिंदूर, चूड़ी, बिंदी और सोलह श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करती हैं। माना जाता है कि नीम में देवी दुर्गा का वास होता है और उसका पूजन करने से स्त्रियों को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। नीम की शीतलता और औषधीय गुण तन और मन दोनों को शुद्ध करने में सहायक होते हैं।

