जन्माष्टमी पर्व पर मंदिरों सहित घरों में सजाए कन्हैया के झूले....
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/ कमलेश जैन) भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी पर 16 अगस्त को आज जन्माष्टमी का महापर्व मनाया जा रहा है। जन्माष्टमी का पर्व न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह जीवन के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को भी दिखाता है। भगवान कृष्ण ने जिस तरह से अपनी लीलाओं के माध्यम सेअधर्म का नाश किया, वह हमें सिखाता है ।कि सत्य और धर्म के मार्ग पर चलकर ही जीवन में सफलता प्राप्त की जा सकती है। यह पर्व प्रेम, भक्ति और त्याग का प्रतीक है।
भगवान श्री कृष्ण पर आस्था और विश्वास रखने वाले तमाम सनातनी लोग जिस जन्माष्टमी पर्व का पूरे साल इंतजार करते हैं, उसे आज बड़ी धूम-धाम से मनाया जा रहा है।
योग शिक्षक पंडित लोकेश कुमार के अनुसार वैष्णव परंपरा से जुड़े लोग 16 अगस्त 2025 को अपने लड्डू गोपाल की पूजा करेंगे । हिंदू मान्यता है कि जो कोई व्यक्ति भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर श्री कृष्ण भगवान की विधि-विधान से पूजा करता है, उस पर पूरे साल कान्हा की कृपा बरसती है।
कृष्ण जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार इस साल भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि 15 अगस्त 2025 की रात्रि को 11:50 बजे से लेकर 16 अगस्त 2025 को रात्रि 09:35 बजे रहेगी. चूंकि 16 अगस्त 2025 को अष्टमी तिथि पूरे दिन सूर्यास्त के बाद भी रात्रि 09:35 बजे तक रहेगी, इसलिए सभी वैष्णव और गृहस्थ लोग 16 अगस्त को इस महापर्व को मना रहे हैं।
कान्हा का जन्मोत्सव मनाने के लिए हर कृष्ण भक्त ललायित उत्साहित है। मंदिरों से लेकर घरों में विशेष तैयारियां चल रही थी। मंदिरों को सजाया जा रहा है। घर में भोग बनाने के लिए महिलाओं ने तैयारी शुरू कर दी है।
कस्बे मे जालूकी रोड स्थित शनि मंदिर परिसर में शनि सेवा समिति द्वारा हर वर्ष की भांति आज भी हिंडोला का कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें कृष्ण जन्मोत्सव झूला, माखन मटकी, आदि आकर्षक विभिन्न झांकियां की रोशनी द्वारा सजावट की गई है।
शनि सेवा समिति के ईश्वर नकडा ने बताया कि आस्थावान धार्मिक लोगों को शीतल शिकंजी एवं रात्रि को कृष्ण जन्मोत्सव पर्व पर भोग लगा आरती कर प्रसादी वितरण की जाएगी।


