सरकारी स्कूल में छज्जा गिरने से नाबालिग की मौत का मामला: एईएन सस्पेंड, जेईएन को हटाया और ठेकेदार पर केस
उदयपुर के कोटड़ा में सरकारी स्कूल का छज्जा गिरने से नाबालिग की मौत के मामले में शिक्षा विभाग ने ठेकेदार के खिलाफ केस दर्ज कराया है। साथ ही विभाग के एईएन हेम सिंह को सस्पेंड कर दिया और संविदा पर कार्यरत जेईएन अनिल कश्यप को हटाते हुए सेवाएं समाप्त कर दी। ग्रेड थर्ड टीचर हेम सिंह 11 साल से बतौर एईएन और 15 हजार वेतन में काम करने वाले जेईएन अनिल कश्यप करीब 22 साल से सरकारी स्कूल बिल्डिंग की तकनीकी मॉनिटरिंग का काम देख रहे थे।
इधर, ग्रामीणों ने स्कूल निर्माण में घटिया सामग्री उपयोग लेने का आरोप लगाया। वहीं, घटना के बाद स्कूल का निर्माण का काम तुरंत रोक दिया है। बता दें, एक दिन पहले सरकारी सी.सै.स्कूल पाथरपाड़ी में निर्माणाधीन सरकारी स्कूल का छज्जा गिरने से 11 वर्षीय एक नाबालिग बच्ची की मौत हो गई थी। जबकि एक घायल हो गई थी। जिसका गुजरात में इलाज जारी है।

टीचर-संविदाकर्मी को उच्चाधिकारियों ने ही लगाया: एडीपीसी
सरकारी स्कूल बिल्डिंग निर्माण की मॉनिटरिंग में इंजीनियर के बजाय टीचर और संविदाकर्मी को लगाने के सवाल पर उदयपुर एडीपीसी ननिहाल सिंह का कहना है कि दोनों ने इंजीनियरिंग का डिप्लोमा किया हुआ है। इन्हें जयपुर से उच्चाधिकारियों ने ही डेपुटेशन पर लगाया है। एडीपीसी ने घटना का जिम्मेदार मुख्यतय जेईएन-एईएन को ही बताया लेकिन जब उनसे पूछा कि क्या इस घटना में खुद एडीपीसी की जबावदेही-जिम्मेदारी नहीं थी। तब उन्होंने माना कि वे भी घटना के लिए जिम्मेदार हैं लेकिन तकनीकी रूप से एईएन-जेईएन मॉनिटरिंग करते हैं। उन्होंने बताया कि ठेकेदार की लापरवाही मानते हुए उसके खिलाफ केस दर्ज कराया है।

स्कूल एसडीएमसी कमेटी की बिना अनुमति शुरू हुआ निर्माण निर्माणाधीन स्कूल बिल्डिंग से सरकारी सी.सै.स्कूल पारथरपाड़ी फिलहाल 1 किमी दूर पुराने जर्जर भवन में संचालित हो रहा है। स्कूल केन्द्र सरकार की तरफ से पीएमश्री योजना में चयनित है। जिसकी वजह से नई बिल्डिंग तैयार हो रही है स्कूल टीचर गजेन्द्र ने बताया कि स्कूल एसडीएमसी की बिना अनुमति के निर्माण शुरू कर दिया। एईएन-जेईएन ने हमें निर्माण कार्य से पूरी तरह दूर रहने को कहा था। इसलिए हम कोई ध्यान नहीं दे पाए।

ग्रामीण बोले-घटिया निर्माण के उपयोग से हुई बच्ची की मौत ग्रामीण लातूराम पारगी ने आरोप है कि ठेकेदार ने घटिया सामग्री का उपयोग किया है। सरियों की ठीक से फिटिंग नहीं होने और घटिया सामग्री के कारण मजबूत पकड़ नहीं बनाने के कारण छज्जा गिरा और उससे एक बच्ची की मौत हो गई। ग्रामीण राजाराम ने कहा कि निर्माण से पहले ही बिल्डिंग गिराना शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही को बताता है। कब तक बच्चे घटिया निर्माण की भेंट चढ़ेंगे।
75 लाख बजट में तैयार होने थे 7 कमरे और ग्राउंड जानकारी अनुसार बिल्डिंग निर्माण की मॉनिटरिंग का जिम्मा पूरी तरह एडीपीसी के पास रहता है। केन्द्र सरकार की ओर बिल्डिंग निर्माण के लिए 75 लाख का बजट जारी हुआ। इसमें 7 कमरे, ग्राउंड आदि बनने थे। फरवरी में काम शुरू हुआ और 5 अगस्त को पूरा होना था लेकिन काम पूरा नहीं हुआ। ऐसे में ठेकेदार ने 2 और माह का समय मांगा है।