राजस्थान ग्रामीण बैंक में मनमानी: सहायक प्रबंधक पर ग्राहकों का गुस्सा
KCC-पशु लोन के लिए 15 दिन से चक्कर, विकलांग व्यक्ति बोला- "पैर से लाचार हूं, कितने दिन भूखे-प्यासे घूमूं
सिणधरी (बरकत खान) उपखंड क्षेत्र पायला कंला पंचायत समिति की राजस्थान ग्रामीण बैंक सड़ा शाखा इन दिनों ग्राहकों के आक्रोश का केंद्र बनी हुई है। बैंक के सहायक प्रबंधक सुरजन राम मीणा पर मनमानी करने, काम टालने और ग्राहकों को बेवजह चक्कर कटवाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं, खासकर किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और पशु लोन जैसे जरूरी कार्यों में देरी से सैकड़ों खाताधारक परेशान हैं। ग्राहक कहते हैं, पहले हमारा काम लेटसेट तो होता था, लेकिन अब न काम हो रहा, न संतोषजनक जवाब मिल रहा!"7 दिन से चक्कर काट रहे खाताधारक प्रहलादराम चौधरी ने बताया कि मैं पैर से विकलांग हूं- "मैं पिछले 7 दिनों से बैंक का चक्कर काट रहा हूं। न कोई काम हो रहा, न संतुष्ट जवाब मिल रहा। पूछने पर सहायक प्रबंधक कहते हैं- 'मुझे काम नहीं करना आता, शाखा प्रबंधक आएंगे तब करवा लेना।' मैं पैर से विकलांग हूं, कितने दिन भूखे-प्यासे बैंक के चक्कर लगाऊं? कोई सुनवाई नहीं! पुरे दिन बैंक में भूखे-प्यासे खड़े रहते हैं काम के इंतजार में लेकिन कोई जवाब नहीं देता। तब इस बात को लेकर ग्रामीण बैंक शाखा प्रबंधक सोरभ शर्मा से मैंने फोन के माध्यम से मेरी KCC फाईल को लेकर बात की तो उन्होंने मुझे बताया कि मैं तो डेप्युटेशन पर बाड़मेर हू बैंक संबंधित जरुरी कार्य पुरा करने के लिए मुझे बाड़मेर लगा दिया गया है और मेरी अनुपस्थिति में बैक का कार्य सहायक प्रबंधक सुरजनराम मीणा संभालते हैं,जब मैंने सुरजनराम मीणा की कार्यशैली और व्यवहार के बारे बताया की मै पिछले कई दिनों से चक्कर लगा रहा हूं और बहुत परेशान हूं,तब शर्मा जी ने स्टाफ का पक्ष लेते हुए कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है बैंक सिस्टम की या कोई कागजी कार्यवाही में कमी पेशी भी हो सकती है, फिर भी मैं मीणा जी से बोलता हूं वो काम कर देंगे ऐसे कहते हुए काॅल मेरा काट दिया, लेकिन अभी तक मेरा काम नहीं हुआ। एक और खाताधारक ने बताया की मै 16 अक्टूबर से आज तक रोज बैंक आ रहा हूं। पशु लोन का काम अटका पड़ा है। सुबह से शाम तक भूखे-प्यासे चक्कर लगाते हैं। बार-बार पूछो तो कभी कहते हैं- 'सिस्टम काम नहीं कर रहा, कभी बोलते हैं- 'पशु लोन फाइल करनी नहीं आती, मेरे से बड़े साहब आएंगे तब करवा लेना।' आखिर हम जाएं तो कहां जाएं। सहायक प्रबंधक की लापरवाही से पूरा गांव परेशान है। KCC रिन्यूअल, पशु लोन और अन्य कृषि योजनाओं के फॉर्म कई दिनों से लंबित पड़े हैं। बैंक प्रशासन मौन, ग्रामीणों में आक्रोश बैंक के उच्च अधिकारियों से संपर्क करने पर ग्रामीणों ने कहा है की अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो धरना-प्रदर्शन और जिला कलेक्टर तक शिकायत की जाएगी। ग्रामीण बैंक का मतलब है किसानों की सेवा, न कि चक्कर कटवाना।