कठूमर में झाड़ू लेकर सड़कों पर उतरी वाल्मीकि सेना; वेतन वृद्धि, न्यूनतम मजदूरी और ठेका प्रथा समाप्त करने की माँग को लेकर दिया सांकेतिक धरना
कठूमर (दिनेश लेखी) कस्बे में वाल्मीकि समाज के लोगों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बुधवार को सांकेतिक धरना एवं रैली का आयोजन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष हाथों में झाड़ू लेकर सड़कों पर उतरे और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने वाल्मीकि सेना के बैनर तले कस्बे के प्रमुख मार्गों से रैली निकालकर बताया कि केंद्र सरकार के नए आदेश के अनुसार अकुशल श्रमिकों के लिए निर्धारित 783 रुपये प्रतिदिन मजदूरी लागू करने की मांग करते हुए कहा कि कर्मचारियों को उनके श्रम का उचित पारिश्रमिक मिलना चाहिए। इसके अलावा संगठन ने ठेका प्रथा समाप्त कर सभी सफाई कर्मचारियों को संविदा पर लगाने तथा नगरपालिका में नियुक्त गैर-वाल्मीकि सफाई कर्मचारियों को उनके मूल पदों पर भेजने की मांग भी उठाई।
रैली में महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी रही। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में झाड़ू लेकर सांकेतिक रूप से अपनी एकजुटता और अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।
रैली के दौरान वक्ताओं ने कहा कि समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों एवं लंबित मांगों के समाधान के लिए सरकार को शीघ्र सकारात्मक कदम उठाने चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ तथा समाज के लोगों ने एकजुट होकर अपने अधिकारों की आवाज बुलंद की।
कार्यक्रम में इस अवसर पर अनिल वाल्मीकि, कुलदीप वाल्मीकि, विजयपाल वाल्मीकि, घनश्याम वाल्मीकि, गुलाब वाल्मीकि, राहुल वाल्मीकि, अजय वाल्मीकि, मीरा, संजू, गब्बर, घनश्याम, विकास, आकाश, विशाल, लखन, राकेश, सुंदरी, बिजेंद्र, कृष्णा, रामप्रकाश, आरती, अनंत, ममता, गुड्डा सहित बड़ी संख्या में ठेका सफाई कर्मचारी एवं समाज के लोग युवा, महिलाएं एवं बच्चे मौजूद रहे।


