लूट के मामले में निर्दोष बच्चों को फंसाकर भिजवाया जेल, रैली निकाल निष्पक्ष जांच कराने की मांग, ज्ञापन सौपा
रूपवास (भरतपुर ) कोश्लेन्द्र दत्तात्रेय
कस्बे के नट समाज के दर्जनों महिला पुरुषों ने रैली निकाल लूट मामले की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग को लेकर पुलिस महानिरीक्षक भरतपुर के नाम का ज्ञापन नायब तहसीलदार को दिया। कस्बे के नट समाज के दर्जनों महिला पुरुष व बच्चे भरतपुर मार्ग स्थित अम्बेडकर भवन पर एकत्रित हुए। जहां से इन्हौने लूट की घटना में निर्दोष बच्चों को फंसाने व पुनः जांच करवाए जाने की मांग को लेकर नारेबाजी की। नट समाज के लोग नारेबाजी करते हुए हनुमान चौक, महादेव चौक, स्टेशन मार्ग, मेला मैदान होते हुए उपखण्ड कार्यालय पहुंचे। जहां उपखण्ड अधिकारी के नहीं मिलने पर नट समाज के लोग तहसील कार्यालय पहुंचे। जहां तहसीलदार के भी नहीं मिलने पर नायब तहसीलदार को पुलिस महानिरीक्षक के नाम का ज्ञापन दिया। नट समाज ने दिए ज्ञापन में लिखा कि 12 नवंबर की शाम को 6.47 पर रुपबास के मुख्य बाजार बांके बिहारी कालोनी में स्वर्ण व्यापारी से बैग छीनने की कोशिश कुछ अज्ञात बदमाशों ने की। बैग छीनने में असफल होने पर उन बदमाशों ने गोली चला दी। जो कि पास से गुजर रहे किराना व्यवसायी अरुण गोयल के लगी। रुपबास में इस तरह की घटना पहली बार घटित त हुई थी। लोगों का विरोध बढ़ने लगा। पुलिस पर लोगों का गुस्सा फूटने लगा। लोगों ने आक्रोशित होकर बाजार बंद कर दिया। पुलिस को 72 घंटे का समय बदमाशों को पकड़ने का स्थानीय जनप्रतिनिधियों व व्यापारियों द्वारा दिया गया पुलिस लगभग इस मामले में असफल नजर आ रही थी। क्योंकि उस जगह पर कोई सीसीटीवी कैमरा मौजूद नहीं था। नगरपालिका के सारे कैमरे बंद थे। पुलिस पर उनकी कोई पहचान नहीं थी। पुलिस को एक बड़े आंदोलन का डर सता रहा था। पुलिस द्वारा हमारे 4 बच्चे जिसमें एक नाबालिग को उठा लिया। बिना किसी सबूत के। पुलिस के पास उनको दोषी बताने के कोई सबूत नहीं है। फिर भी इतना बड़ा अपराध उनके उपर रख दिया। पूर्व में उनके विरुद्ध किसी भी प्रकार का कोई मुकदमा नहीं है। पुलिस ने उनका मुंडन करवा बाजार में घुमाया। सरेआम उनको बेइज्जत किया। बिना किसी अपराध के उनको जेल भेज दिया।
हमारे पास बच्चों के निर्दोष होने के पूरे साक्ष्य उपलब्ध है। जिस वक्त घटना हुई थी उस समय हमारा नाबालिग बच्चा भांग के ठेके पर बैठा हुआ है। जिसका साक्ष्य भी हमारे पास उपलब्ध है तथा हमारे 3 बच्चे उस समय पीएनबी बैंक के सामने ई-मित्र से 1800 रुपये निकालने गये थे। रुपये निकालने के बाद बाजार में गए। तब उन्हें इस घटना का अंदाज हुआ तो वह इस घटना को देखने के लिए वहीं रुक गए। जो कि घटना के 5 से 10 मिनट बाद का समय है। जिसका विडियो भी हमारे बच्चे द्वारा बनाया गया। जिसमे वह यह कहता हुआ दिख रहा है। रुपबास में गोली चल गई है। उसके बाद हमारे बच्चे घर आ गए। उन्होंने हमे इस घटना से अवगत करवाया कि आज बाजार में गोली चल गई है। एक सेठ के लड़के को लग गई है तथा अगले दिन 11 बजे पुलिस आई और हमारे बच्चों को उठाकर ले गई। अगर हमारे बच्चे यह घटना करते तो क्या वह घर रुकते। क्या वह अपनी प्रतिदिन दिनचर्या के कार्य करते। पुलिस ने तो जबरदस्ती आरोप रख दिया है। क्योंकि हमारा नाबालिग बच्चा बाजार में कई धुनने की मशीन पर कार्य करता है और उस समय बाजार बंद था तो वह धरना स्थल पर चला गया। जहां बाजार में धरना चल रहा था। वहाँ की विडियो बना रहा था। नए नए बच्चों को शोक होता है। मोबाईल लेने के बाद फोटो विडिओ बनाने का, हम मेहनत करके कमाने वाले लोग है। हम मजदूरी करने वाले लोग है कोई यह नहीं कह सकता कि हमारे बच्चे चौर है।
पुलिस द्वारा जो आरोपी बनाए गए बच्चे है उनकी उम्र 16 से 20 साल की है। आगे चलकर क्या इस तरह से आगे जीवन जी पाएंगे। हम रोज कमाकर खाते वाले लोग है। हमारे बच्चों को रखकर पुलिस कागजों में इतिश्री कर सकती है। जबकि असली अपराधी अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर है। इन बातों से पुलिस द्वारा उनके हौसले बुलंद होगे जब वह आगे किसी घटना को अंजाम देंगे तब पुलिस किसे आरोपी बनाएगा। इस पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय जांच कारवाई जाए। हमारे निर्दोष बच्चों को छुड़ाया जाये व दोषी कर्मियों के खिलाफ सख्त से सख्त कारवाई की जाए। इस अवसर पर गौरव, अजय, रानी, गुड्डी, भोगीराम, शंकर, नीतू, सूरज, पुष्पेन्द्र, सौमेश, गीता, सौनू, राम बेटी आदि मौजूद थे।


