पानी और रोजगार का हो इन्तजाम - रामकिशन
भरतपुर( विष्णु मित्तल) भरतपुर के पूर्व सांसद और शताब्दी पुरुष पंड़ित रामकिशन और किसान नेता इन्दल सिंह जाट ने राजस्थान की भजनलाल सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुऐ कहा कि खासकर भरतपुर जिले के दो बड़े अहम मुद्दें है पानी और रोजगार जिन पर कोई ज्यादा काम नहीं हुआ है जबकि इन दोनों ही बड़ी समस्याओं का समाधान होना चाहिये । दोनों नेताओं ने खासकर मेवात क्षेत्र में कम होते अपराधों और पेपर लीक की घिनौनी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिये राज्य की भजनलाल सरकार को धन्यवाद दिया ।
यह बयान केवल भरतपुर और डीग के संदर्भ में ही दिया गया है । पूर्व सांसद पंड़ित रामकिशन और किसान नेता इन्दल सिंह जाट ने राज्य सरकार के दो वर्ष और भरतपुर डीग के सवालो को लेकर अपना बयान जारी किया है ।
उन्होंने कहा कि इन्टरनेट और गूगल से प्राप्त जानकारी के मुताविक भरतपुर जिले में वर्ष 2022 - 2023 में भरतपुर जिले की 50% प्रतिशत आबादी अनुउत्पादक है जो एक प्रकार से बेरोजगार है जबकि दूसरी और जानकारी के अनुसार जिले में 67% आबादी किसान है जिनमें से 80% किसानों के पास सिंचाई और सफाई का कोई इंतजाम नहीं है ।
उन्होंने कहा कि भरतपुर जिले में २०% आबादी अनुसूचित जाती की है , जबकि भरतपुर ' धोलपुर और करौली जिलो में दूसरे जिलो के मुकाबले महिलाओं की स्थिति ज्यादा खराब है , महिलाओं पर अपराध भी बढ़े है । उन्होंने कहा कि जहाँ आर्थिक और सामाजिक विषमता होती है वहाँ समाज में भष्ट्राचार और अत्याचार ज्यादा होता है ।
उन्होंने कहा कि नकल रोकने और पेपर लीक की घटनाओं पर अवस्थ रोक लगी है साथ ही विशेषकर भरतपुर - डीग जिलों में मेवात क्षेत्र में अपराध बहुत कम हुए है इसके लिये सरकार को धन्यवाद । मेवात में कम होते अपराधों के लिये जहाँ पुलिस और प्रशासन की भूमिका रही है वही मेवात में जागरुकता ओर विभिन्न संगठनों के प्रयासो से ही अपराध कम हुऐ है । उन्होंने कहा कि मेवात में अपराध रोकने के लिये हम लोगों ने भी अनेक सभाऐं और प्रयास किये है । भरतपुर जिले में कौशल महोत्सव के माध्यम से केवल चौवीस सौ लोगों को ही रोजगार मिला है ।
उन्होंने कहा कि इआरसीपी पर अभी भ्रम बना हुआ है लेकिन काम भी धीमा चल रहा है ' सरकार ने अभी इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित नहीं किया है ' इसका जबाब केन्द्रिय जल शक्ति राज्य मंत्री ने दो दिसम्बर को सांसद में दिये अपने बयान में डीपीआर की तकनिकी परिक्षण जलशक्ति मंत्रालय द्वारा करने की बात कही गई थी जो तीन दिसम्बर के प्रमुख अखबारों में प्रकाशित हुई थी , इस लिये जनता में इआरसीपी को लेकर भ्रम बना हुआ है । भरतपुर में आवादी प्रति किलो मीटर भी ज्यादा है। यमुना जल का समझौता भी 1994 में हुआ थी कांग्रेस ' भाजपा दोनों की ही सरकारें केन्द्र . राज्य और हरियाणा में एक साथ रही है लेकिन यमुना का पानी जनता को नहीं मिला । उद्योगपतियों की समिट भी होती है लेकिन जिले में एक भी इकाई स्थापित नहीं हुई । सरकार को अब पानी और रोजगार पैदा करने पर ही ध्यान देना चाहिये ।

