महिलाएं 6 जनवरी को मनाएंगी संकट चौथ, रखेंगी तिलकुट का व्रत
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन) उपखंड क्षेत्र में 6 जनवरी को महिलाओं द्वारा श्रद्धा व आस्था के साथ संकट चौथ (तिलकुट चौथ) का पर्व मनाया जाएगा। इस पर्व को लेकर महिलाओं ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। बाजारों में तिल, गुड़, शक्कर, मूंगफली, खील, बताशे व पूजा सामग्री की खरीदारी तेज हो गई है।
योग शिक्षक पंडित लोकेश कुमार ने बताया कि संकट चौथ का व्रत विशेष रूप से संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य व सुख-समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार पौष माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकट चौथ मनाई जाती है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले स्नान कर व्रत का संकल्प लेती हैं और दिनभर निर्जल या फलाहार रहकर भगवान गणेश व चंद्रदेव की पूजा करती हैं। शाम के समय चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत खोला जाता है। चंद्र दर्शन के समय अर्घ्य देकर संतान की मंगल कामना की जाती है। संकट चौथ को तिलकुट चौथ भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन तिल से बने व्यंजनों का विशेष महत्व होता है।
पारंपरिक प्रसाद किया जाता है तैयार
घरों में तिलकुट, तिल-गुड़ के लड्डू, रेवड़ी व अन्य पारंपरिक प्रसाद बनाए जाते हैं। पूजा के दौरान गणेशजी को दूर्वा, मोदक और तिल अर्पित किए जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से घर-परिवार पर आने वाले संकट दूर होते हैं और संतान को दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है। पर्व को लेकर महिलाओं में यहा खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। मोहल्लों व कॉलोनियों में महिलाएं एक-दूसरे से व्रत की विधि, कथा और नियमों की जानकारी साझा कर रही हैं।
महिलाएं सुनेंगी सामूहिक कथा
कई स्थानों पर सामूहिक रूप से कथा व पूजन का आयोजन भी किया जाएगा। बुजुर्ग महिलाओं द्वारा युवा पीढ़ी को इस व्रत की परंपरा और महत्व बताया जाएगा। जिससे संस्कृति व आस्था की निरंतरता बनी रहे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संकट चौथ का व्रत करने से संतान पर आने वाले कष्ट दूर होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इस दिन महिलाएं एक जगह पर एकत्रित होती है और सामूहिक व्रत कथा सुनती है।