भागवत कथा के समापन पर सुदामा चरित्र और परीक्षित म़ोक्ष प्रसंग सुनाया, 16 जनवरी को पूर्णाहुति और भंडारा
सकट (अलवर) क्षेत्र की राजपुर बड़ा ग्राम पंचायत के गांव चील की बावड़ी में सीता राम जी नवयुवक मंडल एवं ग्रामीणों के सहयोग से चल रही श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का गुरुवार को समापन हुआ। कथा वाचक प्रहलाद दास ने कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र, भगवान श्री कृष्ण का गोकुलधाम गमन और राजा परीक्षित मोक्ष का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति को भक्ति और ज्ञान की प्राप्ति होती है। वह जन्म जन्मांतर के पापों से मुक्त होकर परम लक्ष्य की और अग्रसर होता है। उन्होंने बताया कि जब राजा परीक्षित को ऋषि के श्राप के कारण तक्षक नाग से डसे जाने का वरदान मिला, तो उन्होंने अपना राजपाट पुत्र को सौंप दिया, गंगा तट पर जाकर शुक्र देव जी की शरण ली।
सात दिनों तक शुक्र देव जी के मुख से भागवत कथा के श्रवण से उनका भय और आसक्ति मिट गयी। अंततः तक्षक नाग के विष से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। कथा व्यास ने श्री कृष्ण सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब सुदामा द्वारका पहुंचे तो भगवान कृष्ण अपने सखा के स्वागत में भाव-विह्वल होकर दौड़ पड़े, उन्हें गले लगाया और अपने सिंहासन पर बैठाया उन्होंने सुदामा को अपनी अपार संपत्ति से अधिक प्रेम और मित्रता का उपहार दिया इह मौके पर कलाकारों ने श्री कृष्ण सुदामा की आकर्षक झांकी प्रस्तुत की, इस दौरान भजन गायकों ने अरे द्वारपालो कन्हैया से कह दो, दर पे सुदामा गरीब आ गया है,,, मिलन सात दिन का हमारा तुम्हारा,,, आदि भजनों से श्रोताओं कीआंखें नम कर दी। ग्रामीण लक्ष्मी नारायण शर्मा ने बताया कि भागवत कथा समापन की पूर्णाहुति पर शुक्रवार को ग्रामीणों के सहयोग से भंडारे का आयोजन किया जाएगा।